राजा ब्रूस और मकड़ी (प्रेरणादायक कहानी)
एक बार स्कॉटलैंड के राजा ब्रूस अपने दुश्मनों से हार गए। अपनी जान बचाने के लिए उन्हें एक गुफा में छिपना पड़ा। वह बहुत दुखी और निराश थे, क्योंकि उन्होंने अपना साहस और हिम्मत लगभग खो दी थी।
एक दिन वह गुफा के अंदर लेटे हुए थे। तभी उनकी नजर एक छोटी-सी मकड़ी पर पड़ी, जो अपना जाला बनाने की कोशिश कर रही थी। मकड़ी बार-बार दीवार पर चढ़ती, लेकिन हर बार उसका धागा टूट जाता और वह नीचे गिर जाती।
ऐसा कई बार हुआ, लेकिन मकड़ी ने हार नहीं मानी। वह लगातार कोशिश करती रही। आखिरकार, कई प्रयासों के बाद उसने अपना जाला पूरा बना लिया।
यह देखकर राजा ब्रूस के मन में एक विचार आया—
"जब यह छोटी-सी मकड़ी बार-बार कोशिश करके सफल हो सकती है, तो मैं क्यों नहीं?"
इससे राजा को नई प्रेरणा मिली। उन्होंने फिर से हिम्मत जुटाई, अपनी बची-खुची सेना को इकट्ठा किया और दुश्मनों पर दोबारा हमला करने का निर्णय लिया।
इस बार उन्होंने पूरी ताकत और आत्मविश्वास के साथ युद्ध किया—और अंततः जीत हासिल की।
सीख (Moral):
जब तक सफलता न मिले, तब तक हार मानकर निराश नहीं होना चाहिए। लगातार प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
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