एक धनवान राजा था। उसके पास एक पालतू बन्दर था। वह उसे बहुत चाहता था। वह अपने बन्दर से बार-बार कहता—
“मेरे मित्र, तुमसे अच्छा मेरा कोई और साथी नहीं है।”
प्रतिदिन सुबह बन्दर, राजा के साथ उसके शाही बगीचे में सैर करने जाता था।
एक दिन, हमेशा की तरह राजा बगीचे में टहल रहा था। तभी बन्दर ने घास में छिपा हुआ एक साँप देखा, जो राजा को डसने की ताक में था। बन्दर ने बिना देर किए एक भारी पत्थर उठाया और साँप पर जोर से दे मारा। पत्थर लगते ही साँप मर गया।
राजा यह देखकर बहुत खुश हुआ और बन्दर की प्रशंसा करते हुए बोला—
“तुम सच में मेरे सच्चे मित्र हो। तुमने मेरी जान बचाई है।”
कुछ दिनों बाद, एक दोपहर राजा अपने कक्ष में विश्राम कर रहा था। बन्दर उसके पास बैठा था और उसकी रक्षा कर रहा था। तभी एक मक्खी बार-बार आकर राजा के चेहरे पर बैठने लगी।
बन्दर ने मक्खी को कई बार उड़ाने की कोशिश की, लेकिन वह बार-बार लौट आती। बन्दर को बहुत गुस्सा आ गया। उसने सोचा—
“यह मक्खी मेरे मित्र को परेशान कर रही है, मैं इसे हमेशा के लिए खत्म कर दूँगा।”
इतना सोचकर बन्दर ने पास रखी तलवार उठाई। जैसे ही मक्खी राजा के चेहरे पर बैठी, बन्दर ने पूरी ताकत से तलवार चलाई। मक्खी तो उड़ गई, लेकिन तलवार राजा को लग गई और उसकी मृत्यु हो गई।
बन्दर यह देखकर घबरा गया। उसने अपने अच्छे इरादे से अपने प्रिय मित्र को ही खो दिया।
शिक्षा (Moral):
👉 मूर्ख मित्र से बुद्धिमान शत्रु अधिक अच्छा होता है।
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