नदी के पार, घने जंगलों के बीच एक साधु रहता था। वह कई वर्षों से एक ही साधना में लीन था—पानी पर चलने की सिद्धि प्राप्त करने के लिए।
सुबह से लेकर शाम तक वह तपस्या में डूबा रहता। भोजन के रूप में वह केवल दूध ही ग्रहण करता था।
गांव का एक दूधवाला रोज नदी पार करके साधु के लिए दूध पहुंचाता था। चाहे मौसम कैसा भी हो—बारिश, तूफान या धूप—वह कभी अपने काम में देर नहीं करता।
एक दिन उसे किसी जरूरी काम से दूसरे गांव जाना पड़ा। उसने अपनी बेटी को साधु के पास दूध पहुंचाने की जिम्मेदारी दे दी।
पहले दिन लड़की आसानी से आश्रम पहुंच गई।
लेकिन अगले दिन जोरदार बारिश होने लगी। नदी उफान पर थी। जब लड़की दूध लेकर जाने लगी, तो उसकी मां ने डर के कारण उसे रोक दिया।
शाम को जब बारिश रुकी, तब वह आश्रम पहुंची और साधु से देरी के लिए क्षमा मांगी।
साधु ने कहा,
“अगर कभी नदी में बाढ़ हो, तो इस मंत्र का जाप करना—तुम पानी पर चलकर मेरे पास आ जाओगी।”
असल में, साधु खुद इस मंत्र को आजमाना चाहता था, लेकिन उसे भीतर ही भीतर इस पर विश्वास नहीं था।
लड़की मंत्र लेकर घर लौट आई।
अगली सुबह नदी और भी ज्यादा उफान पर थी। लेकिन लड़की ने बिना डरे मंत्र का जाप किया और विश्वास के साथ पानी पर चलकर नदी पार कर गई।
जब उसने यह बात साधु को बताई, तो उसे विश्वास नहीं हुआ।
वह लड़की के पीछे-पीछे नदी किनारे तक गया और अपनी आंखों से उसे पानी पर चलते हुए देखा।
यह देखकर वह बहुत खुश हुआ और बोला,
“अब मेरी सिद्धि पूरी हो गई!”
उत्साह में उसने भी मंत्र का जाप किया और पानी पर कदम रखने की कोशिश की।
लेकिन जैसे ही उसने कदम बढ़ाया, उसके मन में डर और संदेह आ गया—
“अगर मंत्र काम न किया तो?”
बस यही संदेह उसकी हार बन गया।
जैसे ही वह पानी में उतरा, वह डूब गया।
वहीं लड़की सुरक्षित अपने घर पहुंच गई—क्योंकि उसे पूरा विश्वास था।
सीख (Moral)
सफलता केवल मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि खुद पर अटूट विश्वास होना भी उतना ही जरूरी है।
जिसके मन में विश्वास होता है, वही असंभव को भी संभव बना देता है।
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