बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य में एक राजा रहता था। उसकी सात रानियाँ थीं। उनमें से पहली छह रानियाँ बहुत ही घमंडी और ईर्ष्यालु स्वभाव की थीं, जबकि सबसे छोटी रानी बहुत ही सरल, दयालु और शांत स्वभाव की थी। यही कारण था कि राजा उसे सबसे अधिक प्रेम करते थे।
छहों बड़ी रानियाँ छोटी रानी से जलती थीं। वे हमेशा सोचती रहतीं कि किसी तरह उसे राजा की नजरों से गिरा दें।
कुछ समय बाद छोटी रानी ने सात सुंदर पुत्रों और एक प्यारी-सी पुत्री को जन्म दिया। यह देखकर बाकी रानियाँ और भी अधिक जलने लगीं। उन्होंने मिलकर एक भयानक षड्यंत्र रचा।
जब छोटी रानी सो रही थी, तब उन दुष्ट रानियों ने नवजात बच्चों को चुपके से उठा लिया और उन्हें जंगल में फेंक दिया। उनकी जगह उन्होंने पत्थर रख दिए और राजा से कह दिया कि छोटी रानी ने पत्थरों को जन्म दिया है।
यह सुनकर राजा बहुत क्रोधित और दुखी हुए। उन्होंने छोटी रानी को महल से निकाल दिया और उसे जंगल में भटकने के लिए छोड़ दिया।
उधर, जंगल में एक साधु ने उन बच्चों को देखा। उसे उन पर दया आ गई और उसने उन्हें अपने आश्रम में पाल-पोसकर बड़ा किया। समय बीतता गया, सभी बच्चे बड़े होकर बहुत ही सुंदर और गुणवान बने।
एक दिन वे बच्चे खेलते-खेलते एक बगीचे में पहुंचे। वहां एक चमत्कार हुआ—सातों भाई चंपा के फूल बन गए और उनकी बहन बेला का फूल बन गई।
उसी समय छोटी रानी, जो अब जंगल में भटकते-भटकते वहां पहुंच गई थी, उन फूलों को देखकर बहुत भावुक हो गई। उसके दिल में अजीब-सी ममता उमड़ने लगी।
तभी उन फूलों में से आवाज आई— “मां, हम ही आपके बच्चे हैं। हमें हमारी बुआओं ने धोखा देकर यहां छोड़ दिया था।”
यह सुनकर छोटी रानी की आंखों से आंसू बहने लगे। उसने पूरे प्रेम से उन फूलों को छुआ, और उसी क्षण एक चमत्कार हुआ—सभी फूल फिर से सुंदर बच्चों में बदल गए।
छोटी रानी अपने बच्चों को लेकर राजा के पास गई। उसने सारी सच्चाई बताई। बच्चों को देखकर और सच्चाई जानकर राजा बहुत दुखी हुए।
उन्होंने उन छहों दुष्ट रानियों को कठोर दंड दिया और छोटी रानी को फिर से सम्मान के साथ महल में वापस लाया।
अब पूरा परिवार खुशी-खुशी रहने लगा।
✨ सीख (Moral):
ईर्ष्या और घमंड का अंत हमेशा बुरा होता है।
सच्चाई और प्रेम की हमेशा जीत होती है।
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