एक समय की बात है। एक छोटे से आश्रम में गोविंद नाम का एक निर्धन युवक रहता था। वह न पढ़ा-लिखा था, न ही उसे मंत्र-श्लोक आते थे, लेकिन उसके हृदय में हनुमान जी के प्रति अपार श्रद्धा थी।
वह प्रतिदिन मंदिर की सफाई करता, जल भरता और मन ही मन कहता—
“हे बजरंगबली! मुझसे जो बन पड़े, वही सेवा है।”
🌿 परीक्षा
एक दिन गाँव में एक साधु आए। उन्होंने सब से दान माँगा। अमीर लोगों ने धन दिया, पर गोविंद के पास कुछ भी नहीं था। उसने साधु के चरण धोए, उन्हें बैठाया और पंखा झलने लगा।
साधु ने पूछा—
“वत्स, तुम्हारे पास देने को कुछ नहीं?”
गोविंद बोला—
“महाराज, मेरे पास शरीर और सेवा के सिवा कुछ नहीं।”
🌟 चमत्कार
तभी साधु का रूप बदल गया। वे हनुमान जी के दिव्य रूप में प्रकट हुए। पूरा मंदिर प्रकाश से भर गया।
हनुमान जी बोले—
“गोविंद! तूने सच्ची सेवा की है। सेवा में भावना हो, तो वही सबसे बड़ा दान है।”
हनुमान जी ने उसे आशीर्वाद दिया। गोविंद का जीवन बदल गया। वह ज्ञानवान और सम्मानित बन गया, लेकिन उसका हृदय पहले जैसा ही विनम्र रहा।
🌼 शिक्षा
👉 भगवान को दिखावा नहीं, सच्ची भावना चाहिए।
👉 निस्वार्थ सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है।
0 Comments