प्राचीन समय की बात है। एक राज्य में राजा अहंकारेश्वर नाम का राजा शासन करता था। वह बड़ा पराक्रमी था, लेकिन उसके मन में बहुत अहंकार भर गया था। वह स्वयं को भगवान से भी बड़ा समझने लगा।
एक दिन उसने सभा में घोषणा की—
“मेरे समान शक्तिशाली कोई नहीं। यदि भगवान भी सामने आ जाएँ, तो मैं उन्हें भी पराजित कर दूँ।”
🌫️ शिव की लीला
राजा के वचनों को सुनकर भगवान शिव एक साधारण योगी का रूप धारण कर राजा के दरबार में पहुँचे। उनके शरीर पर भस्म लगी थी और हाथ में कमंडल था।
योगी ने शांत स्वर में कहा—
“राजन, सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, विनम्रता में होती है।”
राजा हँस पड़ा और बोला—
“यदि तुममें शक्ति है, तो मेरे इस पत्थर को उठा कर दिखाओ।”
🪨 चमत्कार
भगवान शिव ने अपनी दृष्टि से ही उस पत्थर को इतना भारी कर दिया कि राजा उसे हिला भी न सका। राजा का गर्व चूर-चूर हो गया। वह काँपते हुए योगी के चरणों में गिर पड़ा।
तभी योगी अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए। आकाश गूंज उठा—
“मैं महादेव हूँ।”
🌺 पश्चाताप और वरदान
राजा ने रोते हुए क्षमा माँगी। भगवान शिव ने कहा—
“अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो उसे त्याग देता है, वही मुझे पाता है।”
राजा का हृदय बदल गया। उसने प्रजा की सेवा शुरू की और जीवन भर शिव भक्ति करता रहा।
🌼 शिक्षा
👉 अहंकार ज्ञान और शक्ति दोनों का नाश करता है।
👉 विनम्रता ही सच्ची भक्ति है।
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