एक गाँव में एक धोबी रहता था। उसके पास एक गधा और एक कुत्ता था।
कुत्ता रात में घर की रखवाली करता था और गधा दिन भर मेहनत करके धोबी के कपड़ों की गठरी अपनी पीठ पर लादकर नदी तक ले जाता और वापस लाता था।
धोबी को कुत्ता बहुत प्यारा था। जब भी धोबी घर आता, कुत्ता खुशी-खुशी अपनी पूँछ हिलाता, उछलकर उसके सीने पर अगले पैर रख देता। धोबी भी प्यार से उसे सहलाता और कभी-कभी रोटी का टुकड़ा भी दे देता।
यह सब देखकर गधे को बहुत ईर्ष्या होती थी। वह सोचता—
“मैं दिन भर इतनी मेहनत करता हूँ, फिर भी मालिक मुझे उतना प्यार नहीं करता जितना इस कुत्ते को करता है।”
एक दिन गधे ने निश्चय किया कि वह भी कुत्ते की तरह व्यवहार करेगा, ताकि मालिक उससे भी प्यार करे।
अगले दिन जैसे ही धोबी उसकी ओर आया, गधा खुशी से उसकी तरफ दौड़ा।
उसने पूँछ हिलाने की कोशिश की और कुत्ते की नकल करते हुए अपने अगले पैर उठाकर धोबी के कंधों पर रख दिए।
गधे का यह अजीब व्यवहार देखकर धोबी घबरा गया। उसने सोचा—
“शायद गधा पागल हो गया है!”
बस फिर क्या था, धोबी ने पास पड़ी लाठी उठा ली और गधे को बुरी तरह पीट दिया।
बेचारा गधा दर्द से चिल्लाता रहा और सोचता रहा कि उससे ऐसी गलती क्यों हो गई।
शिक्षा (Moral):
हर व्यक्ति को अपने स्वभाव और क्षमता के अनुसार ही काम करना चाहिए। दूसरों की नकल करना नुकसानदेह हो सकता है।
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