भगवान् कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कथा

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233गोकुल में प्रतिवर्ष इंद्र देव की पूजा की जाती थी ताकि वे अच्छी वर्षा करें। लेकिन श्रीकृष्ण ने गाँव वालों को समझाया कि असली पूजा गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए, क्योंकि वही हमारी रक्षा करता है और हमें भोजन उपलब्ध कराता है।

गाँववालों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर इंद्र की पूजा करना बंद कर दी। इससे इंद्र देव अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने गोकुल पर मूसलधार वर्षा शुरू कर दी। चारों ओर हाहाकार मच गया।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी गाँववालों को उसके नीचे शरण लेने को कहा। लगातार सात दिनों तक बारिश हुई, लेकिन श्रीकृष्ण ने पर्वत को मजबूती से थामे रखा।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233अंततः, इंद्र देव ने अपनी भूल स्वीकार की और वर्षा रोक दी। उन्होंने श्रीकृष्ण को "गोविंद" की उपाधि दी, जिसका अर्थ है - "गायों और भक्तों के रक्षक"।

सीख: जब हम सच्चाई के मार्ग पर होते हैं, तो भगवान हमारी हर संकट से रक्षा करते हैं।

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