एक घने जंगल में एक तेज़ दौड़ने वाला हिरण रहता था। उसे अपने तेज़ पैरों पर बहुत घमंड था। वह अक्सर दूसरे जानवरों का मज़ाक उड़ाता।
जंगल के पास एक तालाब में एक धीमा-सा कछुआ भी रहता था। एक दिन हिरण ने कछुए से कहा—
“तुम इतने धीरे चलते हो कि अगर बारिश आ जाए तो भी तुम छिप नहीं पाओगे!”
कछुआ मुस्कराया और बोला—
“तेज़ होना अच्छी बात है, लेकिन धैर्य और समझदारी उससे भी बड़ी होती है।”
हिरण ज़ोर से हँसा और बोला—
“अगर हिम्मत है तो मुझसे दौड़ लगाओ।”
कछुए ने चुनौती स्वीकार कर ली।
दौड़ शुरू हुई। हिरण कुछ ही पलों में बहुत आगे निकल गया। उसने सोचा—
“कछुआ तो बहुत पीछे है, थोड़ा आराम कर लेता हूँ।”
वह एक पेड़ के नीचे सो गया।
इधर कछुआ बिना रुके, धीरे-धीरे चलता रहा।
जब हिरण की नींद खुली, तो उसने देखा कि कछुआ मंज़िल के पास पहुँच चुका है।
हिरण पूरी ताक़त से दौड़ा, लेकिन देर हो चुकी थी।
कछुआ दौड़ जीत चुका था।
हिरण को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने कछुए से माफ़ी माँगी।
शिक्षा:
घमंड पतन का कारण बनता है और निरंतर प्रयास से सफलता मिलती है।
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