अदृश्य खतरे की परछाई


https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बरसात की एक अंधेरी रात थी। गाँव शिवपुर में अचानक बिजली गुल हो गई। चारों तरफ़ सन्नाटा छा गया, सिर्फ़ तेज़ हवाओं की आवाज़ सुनाई दे रही थी। उसी रात गाँव के पुराने पीपल के पेड़ के पास से किसी के चलने की आहट आने लगी।
लोगों का कहना था कि वहाँ एक अदृश्य आदमी घूमता है।
रमेश, जो शहर से पढ़ाई करके अभी-अभी गाँव लौटा था, इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। उसने तय किया कि वह इस रहस्य का पता लगाएगा।
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233अगली रात वह टॉर्च लेकर पीपल के पेड़ के पास पहुँचा। जैसे ही उसने टॉर्च जलाई, उसे मिट्टी पर नंगे पैरों के निशान दिखे—लेकिन वहाँ कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
अचानक उसके कानों में एक धीमी आवाज़ गूँजी—
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233“सच जानना चाहते हो?”
रमेश डर गया, पर भागा नहीं। उसने हिम्मत करके कहा,
“हाँ! तुम कौन हो?”
तभी हवा तेज़ हो गई और सामने एक धुंधली-सी आकृति उभरी। वह कोई भूत नहीं था, बल्कि गाँव का ही पुराना चौकीदार हरि काका था। लोग समझते थे कि वह सालों पहले मर चुका है, लेकिन असल में वह जंगल में छिपकर रहता था।
हरि काका ने बताया कि गाँव के कुछ लालची लोग ज़मीन हड़पने के लिए रात में चोरी और डर फैलाते थे। लोग भूत के डर से बाहर नहीं निकलते थे।
रमेश ने पूरी बात गाँव वालों को बताई। सच सामने आते ही डर खत्म हो गया और दोषियों को पकड़ लिया गया।
उस रात के बाद शिवपुर में फिर कभी कोई अदृश्य साया नहीं दिखा।
सीख:
डर अक्सर अज्ञान से पैदा होता है, और सच उसे हमेशा मिटा देता है।परछाई
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बरसात की एक अंधेरी रात थी। गाँव शिवपुर में अचानक बिजली गुल हो गई। चारों तरफ़ सन्नाटा छा गया, सिर्फ़ तेज़ हवाओं की आवाज़ सुनाई दे रही थी। उसी रात गाँव के पुराने पीपल के पेड़ के पास से किसी के चलने की आहट आने लगी।
लोगों का कहना था कि वहाँ एक अदृश्य आदमी घूमता है।
रमेश, जो शहर से पढ़ाई करके अभी-अभी गाँव लौटा था, इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। उसने तय किया कि वह इस रहस्य का पता लगाएगा।
अगली रात वह टॉर्च लेकर पीपल के पेड़ के पास पहुँचा। जैसे ही उसने टॉर्च जलाई, उसे मिट्टी पर नंगे पैरों के निशान दिखे—लेकिन वहाँ कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
अचानक उसके कानों में एक धीमी आवाज़ गूँजी—
“सच जानना चाहते हो?”
रमेश डर गया, पर भागा नहीं। उसने हिम्मत करके कहा,
“हाँ! तुम कौन हो?”
तभी हवा तेज़ हो गई और सामने एक धुंधली-सी आकृति उभरी। वह कोई भूत नहीं था, बल्कि गाँव का ही पुराना चौकीदार हरि काका था। लोग समझते थे कि वह सालों पहले मर चुका है, लेकिन असल में वह जंगल में छिपकर रहता था।
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रमेश ने पूरी बात गाँव वालों को बताई। सच सामने आते ही डर खत्म हो गया और दोषियों को पकड़ लिया गया।
उस रात के बाद शिवपुर में फिर कभी कोई अदृश्य साया नहीं दिखा।
सीख:
डर अक्सर अज्ञान से पैदा होता है, और सच उसे हमेशा मिटा देता है।

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