"नीयत की असली पहचान"


https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233 किसी नगर में एक सेठ और उसकी सेठानी रहते थे। दोनों बहुत ही अमीर थे, धन-दौलत, नौकर-चाकर, बड़ा सा मकान—किसी चीज़ की कोई कमी नहीं थी। लेकिन कहते हैं न, “समय बदलते देर नहीं लगती, और नीयत ही है जो इंसान का असली मूल्य तय करती है।”

एक दिन अचानक सेठ को व्यापार में बहुत बड़ा घाटा हो गया। धीरे-धीरे उसकी सारी संपत्ति बिक गई। नौकर-चाकर चले गए, हवेली नीलाम हो गई, और हालात ऐसे बन गए कि उन्हें छोटे से किराए के मकान में रहना पड़ा। अब रोज़ की रोटी भी मुश्किल से जुटती थी।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233 सेठ का स्वभाव पहले बहुत घमंडी था। लेकिन जब सब कुछ चला गया तो उसमें नम्रता आ गई। अब सेठ और सेठानी ईमानदारी से गुज़ारा करने लगे। सेठानी ने घरों में काम करना शुरू किया, और सेठ ने एक छोटी सी दुकान खोल ली।

एक दिन नगर के राजा का राजदरबार लगा था। राजा ने ऐलान किया —
"जो भी व्यक्ति सबसे अच्छी 'नीयत' की मिसाल देगा, उसे हम राज्य का महामंत्री नियुक्त करेंगे।"

बहुत से लोग आए। किसी ने दान-पुण्य की बातें की, किसी ने धर्म की, लेकिन राजा संतुष्ट नहीं हुआ।

तभी एक वृद्ध व्यक्ति साधारण कपड़ों में आया। वही पूर्व का सेठ था। उसने राजा को प्रणाम किया और बोला,
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233 "महाराज, जब मेरे पास सब कुछ था, तब मेरा सिर आसमान में था, लेकिन जब कुछ न बचा, तो धरती ने मुझे सिखाया कि असली इंसान वही है, जो बुरे समय में भी अच्छा रहे। मैंने अपनी पत्नी के साथ मेहनत की, मेहनत से रोटी कमाई, लेकिन किसी का हक नहीं छीना। यही है मेरी नीयत।"

राजा यह सुनकर बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा —
"संपत्ति तो समय के साथ आती-जाती है, लेकिन नीयत वही होती है जो इंसान को राजा बना सकती है।"

राजा ने सेठ को महामंत्री नियुक्त कर दिया।

सीख:
नीयत अच्छी हो, तो बुरा समय भी इंसान को कुछ न कुछ सिखाकर जाता है। धन-दौलत तो समय की मेहरबानी है, लेकिन नेक नीयत ही असली पूंजी है।



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