नरसी मेहता एक निर्धन ब्राह्मण थे। वे भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। उनका सारा जीवन भगवान का भजन गाने, कीर्तन करने और सेवा में बीतता था। वे इतने तन्मय होकर भक्ति करते थे कि भूख-प्यास का भी ध्यान नहीं रहता।
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233🌾 समाज की उपेक्षा:
उनकी गरीबी और भक्ति के कारण लोग उनका उपहास उड़ाते थे। उन्हें "निकम्मा" तक कहा जाता। पर नरसी को संसार की बातों की कोई परवाह नहीं थी। उनका एक ही उद्देश्य था — "हरि नाम गाना"।
🛕 एक बार की घटना:
उनकी बेटी का विवाह तय हुआ, लेकिन घर में धन नहीं था। समाज ने ताना मारा:
"अब देखो, क्या भगवान खुद आकर दहेज देंगे?"
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233नरसी ने भगवान से कुछ नहीं माँगा। वे बस भजन करते रहे और बोले: "मुरलीधर जो देंगे, वही मेरे लिए पर्याप्त है।"
✨ चमत्कार:
शादी वाले दिन अचानक एक दिव्य रूपवान व्यक्ति सजे हुए बैलगाड़ी में पहुँचा। ढेर सारे सोने-चाँदी के बर्तन, कपड़े और मिठाइयाँ लेकर आया।
उसने कहा, "ये नरसी मेहता की बेटी की शादी के लिए श्रीकृष्ण ने भेजा है।"
सभी दंग रह गए! विवाह भव्य रूप से हुआ। लेकिन बाद में वह व्यक्ति गायब हो गया। तब सबको समझ आया — वह कोई और नहीं, स्वयं भगवान श्रीकृष्ण थे।
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233🥹 अंत में:
लोग नरसी के चरणों में गिर पड़े। अब पूरा समाज उन्हें सम्मान देने लगा। पर नरसी बोले:
"मैं तो बस उसका दास हूँ जिसने बांसुरी बजाकर मेरा जीवन मधुर कर दिया।"
🌟 सीख:
> जो सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। भक्ति में संदेह नहीं, विश्वास चाहिए।
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