https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233अजय एक गरीब लेकिन होशियार लड़का था। उसके पिताजी एक बढ़ई थे और माँ घरों में काम करती थीं। अजय की पढ़ाई में गहरी रुचि थी, लेकिन उसके पास किताबें और कॉपी खरीदने के पैसे नहीं थे। एक दिन, जब वह स्कूल से लौट रहा था, तो रास्ते में उसे एक बूढ़े बाबा मिले।
बाबा ने अजय से पूछा, "बेटा, तुम इतने उदास क्यों हो?"
अजय ने अपनी समस्या बता दी। बाबा मुस्कुराए और अपनी झोली से एक पुरानी लकड़ी की पेंसिल निकालकर उसे देते हुए बोले, https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233"यह कोई साधारण पेंसिल नहीं है। जो कुछ भी तुम इससे लिखोगे, वह सच हो जाएगा। लेकिन इसे हमेशा अच्छे कामों के लिए इस्तेमाल करना।"
अजय ने धन्यवाद कहा और पेंसिल लेकर घर आ गया। उसे यकीन नहीं हुआ कि यह पेंसिल सच में जादुई हो सकती है। उसने कागज पर एक सुंदर चित्र बनाया—एक किताब और एक नई स्कूल ड्रेस। जैसे ही उसने चित्र पूरा किया, सामने टेबल पर एक नई किताब और ड्रेस आ गई!
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233अजय को अपनी किस्मत पर विश्वास नहीं हुआ। उसने इस पेंसिल का उपयोग गरीब बच्चों की मदद के लिए किया। वह उनके लिए खाना, कपड़े और किताबें बनाकर देने लगा। कुछ ही दिनों में उसका गाँव खुशहाल हो गया। लेकिन एक दिन, एक लालची आदमी यह खबर सुनकर उसके पास आया और पेंसिल छीनने की कोशिश की।
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233अजय समझ गया कि इस पेंसिल का गलत हाथों में जाना खतरनाक होगा। उसने तुरंत कागज पर लिखा— "यह पेंसिल अब गायब हो जाए और किसी बुरे इंसान को कभी न मिले।" पेंसिल अचानक हवा में घुल गई और हमेशा के लिए गायब हो गई।
अब अजय को भरोसा था कि असली जादू किसी चमत्कारी पेंसिल में नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और अच्छाई में था। उसने पढ़ाई जारी रखी और बाद में एक बड़ा वैज्ञानिक बना, जिससे उसका गाँव और देश दोनों गौरवान्वित हुए।
सीख:
असली जादू हमारे कर्मों में होता है, न कि किसी जादुई चीज़ में!
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