kahani hindi story"चतुर लोमड़ी की बुद्धिमानी"

एक समय की बात है, एक किसान दिनभर अपने खेतों में काम करके घर वापस लौट रहा था। तभी उसने सहायता के लिए पुकारती एक कातर आवाज सुनी। उसने इधर-उधर देखा, थोड़ा घूमा-फिरा भी, तब कहीं जाकर उसकी समझ में आया कि आवाज एक बड़े पत्थर के नीचे से आ रही थी।

किसान ने झुककर पत्थर हटाने की कोशिश की। पत्थर थोड़ा हिला तो उसे नीचे फंसा हुआ एक साँप दिखाई दिया। साँप ने विनती की, "कृपया मेरी मदद करो, मैं यहाँ दबा हुआ हूँ, अगर तुम मुझे बचा लोगे तो मैं तुम्हारा उपकार मानूंगा।"

किसान को साँप पर दया आ गई। उसने पूरी ताकत लगाकर पत्थर को हटाया और साँप को मुक्त कर दिया। मगर जैसे ही साँप बाहर निकला, वह फुफकारता हुआ बोला, "मैं भूखा हूँ, मुझे तुम्हें खाना पड़ेगा!"

किसान घबरा गया और बोला, "मैंने तुम्हारी जान बचाई और तुम मुझे ही मारने चले हो? यह कहाँ का न्याय है?"

साँप ने जवाब दिया, "इस दुनिया में उपकार का यही फल मिलता है। जो मजबूत होता है, वही राज करता है!"

किसान ने कहा, "अगर ऐसा ही है तो पहले किसी और से पूछ लेते हैं कि यह उचित है या नहीं।"

साँप ने सहमति जताई। दोनों पास के जंगल में गए और सबसे पहले एक बूढ़े बैल से मिले। किसान ने पूरी बात बताई और न्याय करने को कहा।

बैल हँसकर बोला, "मैंने सालों तक अपने मालिक के लिए काम किया, मगर जब मैं बूढ़ा हो गया, तो उसने मुझे जंगल में छोड़ दिया। इस दुनिया में उपकार का यही परिणाम मिलता है।"

साँप ने गर्व से सिर हिलाया, "देखा! मैं सही कह रहा था।"

लेकिन किसान संतुष्ट नहीं हुआ। वे आगे बढ़े और एक लोमड़ी से मिले। लोमड़ी बहुत चतुर थी। उसने पूरी बात सुनी और सोची, 'साँप की फितरत पर भरोसा नहीं किया जा सकता, किसान को बचाना होगा।'

लोमड़ी ने चतुराई से कहा, "मैं ठीक से समझ नहीं पाई कि साँप किस तरह पत्थर के नीचे दबा हुआ था। अगर तुम फिर से उसी तरह दब जाओ तो मैं देख सकूँगी कि किसान ने कैसे तुम्हें बचाया।"

साँप को लोमड़ी की बात सही लगी। वह वापस पत्थर के नीचे चला गया। किसान और लोमड़ी ने जल्दी से भारी पत्थर को उसके ऊपर लुढ़का दिया। साँप फिर से वहीं फँस गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा।

लोमड़ी ने हँसते हुए किसान से कहा, "अब इसे वहीं रहने दो! उपकार का बदला इस तरह से देने वालों को अपनी करनी का फल भुगतने देना चाहिए।"

किसान ने लोमड़ी को धन्यवाद दिया और दोनों वहाँ से चले गए।

शिक्षा:
बुद्धिमानी और चतुराई से बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है।


Post a Comment

0 Comments