एक सिपाही था, जो बहुत बलवान, बहादुर और वीर था। वह युद्ध में दुश्मनों को परास्त करने के लिए प्रसिद्ध था। उसका घोड़ा भी तेज़ और शक्तिशाली था, जो हवा से बातें करता था। लेकिन सिपाही की एक आदत थी—वह हर काम को टाल देता था।
एक दिन राजा ने उसे बुलाया और कहा, "शत्रु हमारी सीमा पर आ चुके हैं। हमें तुरंत उन पर आक्रमण करना होगा!"
सिपाही बोला, https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233"महाराज, चिंता मत कीजिए। कल सुबह मैं युद्ध के लिए तैयार हो जाऊँगा।"
राजा ने कहा, https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233"कल क्यों? आज ही क्यों नहीं?"
लेकिन सिपाही ने सोचा, "थोड़ी देर आराम कर लूँ, फिर जाऊँगा।" और वह सो गया।
इसी बीच, दुश्मन सेना ने अचानक हमला कर दिया। महल में अफरा-तफरी मच गई। राजा की सेना तैयार नहीं थी। जब सिपाही जागा, तो बहुत देर हो चुकी थी। राजा की सेना हार चुकी थी, और शत्रु महल के द्वार तक पहुँच चुके थे।
सिपाही को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अपने घोड़े पर चढ़कर पूरी ताकत से युद्ध किया, लेकिन अब पछताने से कुछ नहीं हो सकता था।
अंत में, राजा ने हार मान ली, और सिपाही भी पराजित हो गया। जाते-जाते उसे एक बात समझ आई—
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233"कल पर कभी भरोसा मत करो, जो करना है, वह आज ही करो!"
शिक्षा:
समय की कीमत को समझो। जो काम कल पर टालोगे, वह मुसीबत बन सकता है। इसलिए "कल करे सो आज कर, आज करे सो अब।"
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