kahani hindi storyधोबी, कुत्ता और गधा


एक गांव में एक मेहनती धोबी रहता था। वह अपने काम में बहुत ईमानदार था। जो भी कपड़े धोने आते, वह उन्हें साफ-सुथरा करके समय पर लौटा देता। उसकी मेहनत और लगन के कारण गांव के लोग उसे बहुत पसंद करते थे। धोबी के पास दो पशु थे – एक कुत्ता और एक गधा।


कुत्ता धोबी के घर की रखवाली करता था। रात में वह चौकन्ना रहकर किसी भी चोर या खतरे से घर की सुरक्षा करता। वहीं, गधा दिनभर कपड़े लादकर नदी से घाट तक ले जाता और धोबी के काम में मदद करता। दोनों ही अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते थे और धोबी इनसे खुश रहता था।


कुत्ते और गधे की बातचीत


एक रात, कुत्ता अपनी जगह पर सो रहा था। उसी समय, एक चोर धोबी के घर में घुसने की कोशिश करने लगा। गधे ने यह देखा और कुत्ते से कहा,

"तुम क्यों सो रहे हो? चोर घर में घुस रहा है। जल्दी भौंको और मालिक को जगाओ।"


कुत्ते ने आलस्य से कहा,

"आज मुझे कोई भौंकने का मन नहीं है। मालिक तो मुझे ठीक से खाना भी नहीं देता। चोर घर में आएगा, कुछ सामान ले जाएगा, तो मालिक को मेरी अहमियत समझ में आएगी।"


गधे ने सोचा कि अगर कुत्ता नहीं भौंकेगा, तो उसे खुद ही कुछ करना होगा। गधा जोर-जोर से रेंकने लगा ताकि धोबी जाग जाए। धोबी गधे की आवाज सुनकर गुस्से में बाहर आया और सोचा कि गधा बिना बात शोर मचा रहा है। उसने गधे को डांटते हुए कहा,

"रात को चैन से सोने नहीं देता। चुपचाप खड़ा रहो!"


चोर यह सुनकर डरकर भाग गया, लेकिन गधा सोचने लगा,

"मैंने मालिक की मदद करने की कोशिश की, फिर भी मुझे डांट पड़ी।"


शिक्षा:


1. हर काम का एक उचित समय और तरीका होता है।



2. दूसरों की जिम्मेदारी में दखल देना हमेशा सही परिणाम नहीं लाता।



3. अपने कार्य और कर्तव्य को समझदारी और धैर्य के साथ निभाना चाहिए।

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