बहुत समय पहले की बात है। एक युवा संत ने कठिन तपस्या और ध्यान के बाद एक ऐसा मंत्र प्राप्त किया जिससे पूरे जगत को वश में किया जा सकता था। इस मंत्र का जाप करने पर सभी जीव-जंतु उनकी आज्ञा मानने लगते। संत ने इस मंत्र का प्रयोग केवल जरूरतमंदों की सहायता के लिए करने का निश्चय किया।
एक दिन, जब संत जंगल में एक शांत स्थान पर बैठकर मंत्र का जाप कर रहे थे, तभी एक चालाक सियार पास ही छिपकर यह मंत्र सुनने लगा। सियार बेहद लालची और चतुर था। उसने मंत्र को याद कर लिया और सोचा, “अगर मैं इस मंत्र का उपयोग करूं, तो मैं जंगल का राजा बन सकता हूं!”
सियार का छल
चालाक सियार ने मंत्र का प्रयोग करना शुरू कर दिया। मंत्र की शक्ति से उसने जंगल के सभी पशु-पक्षियों को वश में कर लिया। शेर, हाथी, हिरण, पक्षी—सब उसकी आज्ञा मानने लगे। सियार ने खुद को जंगल का राजा घोषित कर दिया और शेर को अपना सेवक बना लिया। अब वह शेर की पीठ पर बैठकर जंगल में घूमता और सभी जानवर उससे डरकर उसकी सेवा करते।
शहर की ओर यात्रा
सियार के मन में अहंकार बढ़ने लगा। उसने सोचा, “अब मैं सिर्फ जंगल का राजा नहीं रहूंगा। मैं शहर पर भी राज करूंगा!” वह मंत्र का जाप करता हुआ शहर की ओर बढ़ा। उसके साथ शेर, चीते, हाथी और अन्य जंगली जानवरों की सेना भी थी। वह शेर की पीठ पर बैठा हुआ गर्व से दहाड़ रहा था। शहर के लोग इस अजीब दृश्य को देखकर भयभीत हो गए।
अहंकार का पतन
शहर के बाहरी इलाके में एक ऋषि रहते थे। उन्होंने सियार की यह हरकत देखी और समझ गए कि यह मंत्र की शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है। ऋषि ने अपनी साधना से मंत्र का प्रभाव निष्क्रिय कर दिया। जैसे ही मंत्र की शक्ति समाप्त हुई, सभी जानवर मंत्र के प्रभाव से मुक्त हो गए।
शेर ने जब देखा कि वह एक सियार के वश में था, तो उसे क्रोध आया। उसने सियार को दहाड़ते हुए दौड़ाया। सियार अपनी जान बचाने के लिए जंगल की ओर भागा और फिर कभी किसी को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं की।
शिक्षा
अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग हमेशा विनाश का कारण बनता है। शक्ति का उपयोग हमेशा सही कामों के लिए करना चाहिए।
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