https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बहुत समय पहले एक छोटे से राज्य में एक दयालु और बुद्धिमान राजा शासक था। उसका नाम राजा सूर्यवीर था। वह अपने प्रजा के प्रति बहुत स्नेह रखता था और राज्य में शांति और समृद्धि बनाए रखने की कोशिश करता था। एक दिन वह राज्य के एक कोने में यात्रा पर निकला, जहाँ उसने एक साधू को देखा, जो एक पेड़ के नीचे ध्यानमग्न बैठा था।
राजा सूर्यवीर ने साधू को देखा और उसकी साधना के प्रति गहरी श्रद्धा महसूस की। वह साधू के पास गए और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए कहा। साधू ने राजा को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "राजन, तुम्हारी प्रजा सुखी है, लेकिन तुम्हारे दिल में कुछ शांति की कमी है। तुम्हें उस शांति को ढूँढना होगा, जो तुम बाहर से नहीं पा सकते, बल्कि तुम्हारे अंदर ही है।"
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233राजा ने यह बात ध्यान से सुनी और साधू से पूछा, "मुझे अपने दिल की शांति कैसे मिलेगी?"
साधू ने उत्तर दिया, "तुम्हें अपनी इच्छाओं और अहंकार को शांत करना होगा। एक दिन तुम्हें यह समझ में आएगा कि संसार में जो भी तुम चाहोगे, वह बाहरी चीजें हैं, लेकिन असली शांति केवल भीतर से आती है।"
राजा सूर्यवीर ने साधू की बातों को अपने दिल में बसाया और घर वापस लौटते समय उसने सोचा कि उसने बहुत सारी भौतिक चीजों के पीछे दौड़ते हुए अपनी आंतरिक शांति खो दी है। उसने तय किया कि अब वह केवल अपने कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित करेगा और अपनी प्रजा के भले के लिए काम करेगा, लेकिन अपनी आंतरिक शांति को खोने नहीं देगा।
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233समय बीता और राजा सूर्यवीर ने अपने शासन में न्याय और धर्म की स्थापना की, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने अपनी आंतरिक शांति प्राप्त की। अब वह न केवल बाहरी सुखों में, बल्कि आत्मा की गहरी शांति में भी संतुष्ट था।
समाप्त
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