एक नदी के किनारे दो विशाल पेड़ खड़े थे। उनके पास से एक छोटी सी चिड़िया गुजरी। वह चिंतित और व्याकुल दिख रही थी। उसने पहले पेड़ से पूछा,
"बारिश होने वाली है। क्या मैं और मेरे बच्चे तुम्हारी शाखाओं पर घोंसला बनाकर रह सकते हैं?"
पहला पेड़ घमंड से भरकर बोला,
"मैं इतना मजबूत और ऊँचा हूँ कि मुझे तुम्हारे जैसे छोटे पक्षियों की कोई ज़रूरत नहीं। तुम मेरे पास रहने से मेरी सुंदरता को बिगाड़ दोगी। जाओ, कहीं और घर ढूँढो।"
चिड़िया उदास हो गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह दूसरे पेड़ के पास गई और वही सवाल पूछा।
दूसरा पेड़ विनम्रता से मुस्कुराया और बोला,
"तुम और तुम्हारे बच्चों का स्वागत है। मेरे पास आओ, यहाँ तुम्हें सुरक्षा और सहारा मिलेगा।"
चिड़िया ने जल्दी से उस पेड़ की शाखाओं पर घोंसला बना लिया। कुछ दिनों बाद, तेज़ बारिश और आंधी आई। पहला पेड़, जो खुद पर बहुत घमंड करता था, आंधी को सहन नहीं कर पाया और गिर गया। लेकिन दूसरा पेड़, जो चिड़िया और उसके बच्चों को सहारा देने के लिए झुका हुआ था, स्थिर खड़ा रहा।
इस घटना ने चिड़िया को एक बड़ी सीख दी। उसने अपने बच्चों से कहा,
"हमेशा विनम्र और दयालु बनो। घमंड और स्वार्थ का अंत हमेशा बुरा होता है।"
सीख:
विनम्रता और दया न केवल दूसरों को सहारा देती हैं, बल्कि हमें भी स्थिर और सशक्त बनाती हैं।
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