यह कहानी उस लोमड़ी की नहीं थी जो मटर के खेत में दाखिल हुई थी, बल्कि एक ऐसी लोमड़ी की थी, जो अपनी चालाकी और होशियारी के लिए मशहूर थी।
सर्दियों का मौसम था और गांव के लोग अपने-अपने खेतों में काम कर रहे थे। एक दिन, जैसे ही दोपहर का समय आया, एक खूबसूरत धूप बिखरी थी, जो खेतों में हल्की सी गर्माहट दे रही थी। लेकिन इस धूप में किसी भी जीव का ध्यान इस पर नहीं था। सबकी नज़रें तो उस लोमड़ी पर थीं, जो दूर से खेतों में घुसते हुए दिखाई दी थी। वह लोमड़ी जानती थी कि उसे मटर के खेत में घुसकर कुछ खास काम करना था।
उसने धीरे-धीरे खेत की ओर रुख किया, लेकिन यह कोई साधारण कदम नहीं था। उसने पहले खेत के चारों ओर चक्कर लगाया, फिर पेड़ की छांव में बैठकर मौका देखने लगी। वह किसी की नजरों से बचने की फिराक में थी। उसके पास अपने खेत से मटर चुराने की एक और योजना थी।
"अगर ये खेत मेरे लिए खुल जाएं," उसने सोचा, "तो किसी को पता नहीं चलेगा और मैं जितना चाहूं, उतना मटर चुरा सकती हूं।"
लेकिन अचानक, उसने देखा कि खेतों के पास एक बाघ आ गया था। बाघ ने उसकी गतिविधियों को देखा और उसे पकड़ने के लिए उसकी ओर बढ़ने लगा। लोमड़ी ने बाघ को देखा और तुरंत अपनी पुरानी चालाकी का इस्तेमाल किया। उसने बाघ के पास जाकर उसे कहा, "तुम्हें मेरी मदद की जरूरत है, अगर तुम मटर के खेत में घुसना चाहते हो, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं।"
बाघ थोड़ी देर तक सोचने के बाद उसने अपनी गर्दन हिलाई और कहा, "ठीक है, लेकिन जल्दी करो।"
लोमड़ी ने बड़ी चालाकी से बाघ को खेत के किनारे तक पहुँचाया और उसे घुसने का रास्ता दिखा दिया। लेकिन जैसे ही बाघ खेत में घुसा, लोमड़ी ने अपनी पुरानी चाल में उसे धोखा दे दिया। बाघ, जिसे मटर के खेत का स्वाद लेने का शौक था, अब खुद ही खेत के जाल में फंस चुका था। लोमड़ी चुपके से खेत से बाहर निकल आई और मुस्कुराते हुए अपनी जीत का मजा लिया।
वह जानती थी कि चालाकी और बुद्धिमानी से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, चाहे वो मटर के खेत में छुपा हो या जीवन के किसी और कोने में।
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