एक समय की बात है, एक घना जंगल था। उस जंगल में एक बड़ा और सुंदर सेब का पेड़ खड़ा था। उसकी शाखाएँ फल-फूल से लदी रहती थीं। उस पेड़ के पास एक छोटा बच्चा रोज़ खेलने आया करता था।
बच्चा पेड़ की डालियों पर चढ़ता, उनसे लटकता और मीठे-मीठे सेब खाता। कभी वह पेड़ के नीचे बैठकर अपनी किताबें पढ़ता, तो कभी उसकी छाया में सो जाता। सेब का पेड़ भी उस बच्चे से बहुत प्यार करता था। जब भी बच्चा हंसता, पेड़ की पत्तियाँ खुशी से झूमने लगतीं।
समय बदला
दिन बीतते गए। बच्चा बड़ा हो गया और अब वह रोज़ खेलने नहीं आता था। एक दिन वह पेड़ के पास आया। पेड़ ने मुस्कुराकर कहा,
"आओ, मेरे साथ खेलो।"
बच्चे ने कहा, "मैं अब बड़ा हो गया हूँ। मुझे खेलने के लिए समय नहीं है। मुझे पढ़ाई के लिए किताबें चाहिए।"
पेड़ ने सोचा और कहा, "मेरे पास तुम्हें देने के लिए किताबें तो नहीं हैं, लेकिन तुम मेरे फल ले लो और उन्हें बेचकर पैसे कमा लो। उनसे किताबें खरीद लेना।"
बच्चे ने खुशी-खुशी सेब तोड़े और उन्हें लेकर चला गया। पेड़ खुश था कि उसने उसकी मदद की।
और समय बीता
कई साल बाद बच्चा फिर से पेड़ के पास आया। अब वह युवा था। पेड़ ने कहा,
"आओ, मेरे साथ खेलो।"
युवक ने कहा, "मैं अब खेलने के लिए बहुत व्यस्त हूँ। मुझे अपने लिए एक घर चाहिए।"
पेड़ ने कहा, "मेरे पास घर तो नहीं है, लेकिन मेरी शाखाएँ काटकर ले जाओ। उनसे तुम अपना घर बना सकते हो।"
युवक ने पेड़ की शाखाएँ काट लीं और चला गया। पेड़ फिर भी खुश था कि उसने उसकी मदद की।
अंतिम मुलाकात
अब वह बच्चा बूढ़ा हो चुका था। वह एक दिन फिर पेड़ के पास आया। पेड़ ने थकी हुई आवाज़ में कहा,
"अब मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ भी नहीं बचा। मेरे फल, मेरी शाखाएँ, मेरा तना सब तुम ले चुके हो।"
बूढ़े व्यक्ति ने कहा, "अब मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं बस थका हुआ हूँ और यहाँ आराम करना चाहता हूँ।"
पेड़ ने अपनी बची हुई जड़ों की ओर इशारा करते हुए कहा,
"आओ, मेरे पास बैठ जाओ। मेरी जड़ें तुम्हारे आराम के लिए एकदम सही जगह हैं।"
बूढ़ा व्यक्ति पेड़ की जड़ों के पास बैठ गया। पेड़ ने उसकी थकान को अपनी छाया से मिटा दिया।
सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि माता-पिता या हमारे प्रियजन हमारे लिए हर त्याग करते हैं, बिना किसी शिकायत के। हमें उनका हमेशा सम्मान और आभार व्यक्त करना चाहिए।
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