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बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में हाथियों के राजा गजराज का शासन था। गजराज न्यायप्रिय और बुद्धिमान राजा थे। उनके शासन में सभी हाथी खुश रहते थे। लेकिन एक बार जंगल में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई। झीलें और तालाब सूखने लगे। जंगल में पानी की किल्लत हो गई, और हाथियों को पानी के बिना बड़ी परेशानी होने लगी।
परेशान होकर सारे हाथी गजराज के पास पहुँचे और कहा, "हे गजराज, हम सब प्यास से मर रहे हैं। पानी कहीं नहीं मिल रहा। कृपया कुछ उपाय करें।"
गजराज ने शांत स्वर में कहा, "चिंता मत करो। मुझे इस जंगल के पास एक ऐसी झील के बारे में पता है, जो कभी नहीं सूखती। वह हमारी मदद कर सकती है।" सभी हाथियों में उम्मीद की किरण जागी।
अगले दिन गजराज ने सभी हाथियों को उस झील की ओर चलने को कहा। झील बहुत दूर थी, इसलिए यात्रा कठिन थी। लेकिन गजराज के नेतृत्व में पूरा झुंड चल पड़ा। रास्ते में गजराज ने सबको धैर्य रखने और एक-दूसरे की मदद करने की सलाह दी।
कई दिनों की यात्रा के बाद, वे झील तक पहुँचे। झील वाकई पानी से भरी हुई थी। सभी हाथियों ने राहत की सांस ली और झील के पास पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। झील के आसपास हरी-भरी घास भी थी, जिससे उन्हें भोजन भी मिला।
लेकिन तभी गजराज ने देखा कि झील के पास कई खरगोश रहते हैं। गजराज समझ गए कि अगर सारे हाथी झील का पानी और घास का इस्तेमाल करेंगे, तो खरगोशों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। गजराज ने खरगोशों से बात करने का फैसला किया।
गजराज ने कहा, "हम इस झील का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन यह तुम्हारा घर है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि तुम्हें कोई नुकसान न हो। हम अपनी जरूरत के अनुसार ही पानी और घास लेंगे।" खरगोशों ने गजराज की बात सुनकर राहत महसूस की।
गजराज के इस व्यवहार से सभी हाथियों और खरगोशों को एक-दूसरे के साथ रहने का मौका मिला। सभी ने समझदारी और सह-अस्तित्व का सबक सीखा।
कहानी से सीख:
नेता वही होता है जो सभी की भलाई के बारे में सोचे और दूसरों के साथ मिलकर रहे।
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