kahani hindi storyशेर और चतुर सियार


एक समय की बात है, एक भूखा शेर जंगल में शिकार की खोज में भटक रहा था। वह कई दिनों से भूखा था, इसलिए उसकी भूख और चिड़चिड़ापन बढ़ गया था। घूमते-घूमते, उसे एक गुफा दिखाई दी। शेर ने सोचा, "इस गुफा में कोई जानवर ज़रूर रहता होगा। अगर मैं गुफा के अंदर जाऊं, तो शायद मेरा शिकार भाग सकता है। अच्छा होगा कि मैं बाहर झाड़ी में छिप जाऊं और जैसे ही वह बाहर निकले, उसे पकड़ लूं।"

शेर ने अपनी योजना के अनुसार झाड़ी के पीछे छिपकर इंतजार करना शुरू कर दिया।

उस गुफा में वास्तव में एक चतुर सियार रहता था। जब सियार लौटकर गुफा की ओर आया, तो उसने शेर के पंजों के निशान गुफा की ओर जाते देखे। उसने तुरंत समझ लिया कि कोई खतरा है, क्योंकि पंजों के निशान अंदर तो जा रहे थे, लेकिन बाहर आने के निशान नहीं थे।

सियार को शेर की चालाकी का पता चल गया। उसने मन ही मन एक योजना बनाई। उसने गुफा के पास जाकर ऊँची आवाज़ में कहा, "अरे मेरी प्यारी गुफा! रोज़ तो तू मुझे बुलाती है, आज चुप क्यों है? अगर तूने मुझे नहीं बुलाया, तो मैं कहीं और चला जाऊँगा।"

शेर ने सोचा, "ओह! इस गुफा की तो आदत है बोलने की। अगर मैंने गुफा की तरफ से आवाज़ नहीं निकाली, तो सियार यहाँ नहीं आएगा।" शेर ने गुफा के अंदर से जोर से दहाड़ते हुए कहा, "आओ सियार, अंदर आ जाओ।"

शेर की दहाड़ सुनते ही सियार समझ गया कि शेर गुफा के अंदर छिपा है। वह तुरंत वहां से भाग गया और अपनी जान बचा ली।

इस प्रकार चतुराई से सियार ने अपनी जान बचाई, और शेर अपनी मूर्खता के कारण भूखा ही रह गया।

सीख: अपनी बुद्धि और सतर्कता से बड़ी से बड़ी मुसीबत से बचा जा सकता है।

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