एक बड़े और हरे-भरे खेत के बीचों-बीच, एक चिड़िया ने घोंसला बना रखा था। वह घोंसला इतना छोटा और सुंदर था कि जैसे प्रकृति ने उसे खुद सजाया हो। घोंसले में चिड़िया के दो प्यारे और छोटे-छोटे बच्चे रहते थे। चिड़िया रोज सुबह उड़कर दूर-दूर से अपने बच्चों के लिए खाना लेकर आती। वह अपने बच्चों को दाने खिलाती और फिर उनके साथ खेलती।
एक दिन चिड़िया अपने बच्चों से बोली, "बच्चों, हमेशा अपने पंखों पर भरोसा करना। एक दिन तुम भी उड़ना सीख जाओगे और इस खुले आकाश को देखोगे।" बच्चों ने मां की बात ध्यान से सुनी और उनके मन में भी उड़ने की चाह जगने लगी।
कुछ दिनों बाद, जब चिड़िया दाना लेने गई, तो खेत का मालिक वहां आया। उसने सोचा, "यह घोंसला तो मेरी फसल खराब कर देगा। इसे हटाना होगा।" वह घोंसले को हटाने का मन बना चुका था।
शाम को जब चिड़िया घर लौटी, तो उसने यह बात अपने बच्चों को बताई। बच्चों ने डरकर पूछा, "मां, अब क्या होगा? हमारा घोंसला तो टूट जाएगा!"
चिड़िया मुस्कुराई और बोली, "डरो मत। हमें अपनी मेहनत और पंखों पर भरोसा करना चाहिए।"
अगले दिन चिड़िया ने अपने बच्चों को उड़ना सिखाना शुरू किया। पहले-पहल बच्चे डरे, लेकिन धीरे-धीरे उनके पंख मजबूत होने लगे। कुछ ही दिनों में वे उड़ने में माहिर हो गए।
एक सुबह, चिड़िया अपने बच्चों के साथ खेत से दूर एक और सुरक्षित जगह पर चली गई। बच्चों ने आकाश में उड़ते हुए महसूस किया कि मेहनत और साहस से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
शिक्षा:
इस कहानी से हमें सिख मिलती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, हमें अपने आत्मविश्वास और मेहनत से हर समस्या का हल ढूंढना चाहिए।
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