"बुद्धि और बल का संघर्ष"।


यह कहानी एक विशालकाय हाथी और एक चालाक सियार की है।

एक बार की बात है, एक विशालकाय हाथी एक घने जंगल में रहता था। उसकी शारीरिक शक्ति इतनी अधिक थी कि जंगल के सभी प्राणी उससे डरते थे। वह जंगली पौधों को खाकर इतना हष्ट-पुष्ट हो गया था कि कोई भी जानवर उसकी ताकत का मुकाबला नहीं कर सकता था। वह दिनभर जंगल में घूमता, पेड़ों को नष्ट करता और अपने बल से जंगल में राज करता।

एक दिन एक चालाक सियार ने उसे देखा। सियार को यह अहसास हुआ कि यदि वह हाथी से भिड़ेगा तो उसका सामना मुश्किल होगा। मगर सियार को अपनी बुद्धि पर पूरा विश्वास था। उसने सोचा, "बल से तो हाथी मुझे हरा सकता है, लेकिन अगर मैं बुद्धि का इस्तेमाल करूं, तो हो सकता है मैं उसे मात दे सकूं।"

सियार ने हाथी के पास जाकर उसे चिढ़ाने का तरीका ढूंढ़ लिया। उसने कहा, "हे हाथी! तुम अपनी ताकत से सबको डराते हो, लेकिन क्या तुम जानते हो कि सबसे बड़ी ताकत क्या होती है?" हाथी ने अपनी आंखें सिकोड़ते हुए पूछा, "क्या?" सियार मुस्कराया और बोला, "बुद्धि, क्योंकि जो बुद्धिमान होता है, वह बल से भी जीत सकता है।"

हाथी को यह बात मजाक लगी और उसने सियार को चुनौती दी, "अगर तुम्हारे पास बुद्धि है, तो तुम मुझे पराजित करके दिखाओ।"

सियार ने अपनी चालें चलनी शुरू की। वह हाथी के पास गया और कहा, "कल तुम्हारी ताकत को चुनौती देने के लिए मैं एक प्रतियोगिता रखूंगा। अगर तुम जीत गए तो मैं तुम्हारे सामने न झुकूंगा, लेकिन अगर हार गया तो मुझे अपनी शक्ति माननी पड़ेगी।"

अगले दिन सियार ने हाथी को एक गहरी खाई के पास बुलाया। उसने कहा, "हाथी भाई, अब तुम यहां से कूद कर दिखाओ कि तुम्हारी ताकत कितनी है।"

हाथी ने देखा कि खाई बहुत गहरी थी, लेकिन अपनी ताकत पर घमंड करते हुए वह बिना किसी डर के कूद पड़ा। वह खाई में गिर गया और बहुत मुश्किल से बाहर निकल सका।

सियार ने हंसते हुए कहा, "देखा, तुम्हारी शक्ति से तुम खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हो। असली ताकत तो समझदारी में है।"

हाथी को अपनी गलती समझ में आई और उसने सियार से माफी मांगी। उसने यह स्वीकार किया कि सिर्फ बल से ही सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि बुद्धि का भी महत्व है। इस तरह सियार ने अपनी चतुराई से हाथी को उसकी सही जगह पर रखा।

कहानी का संदेश है कि केवल बल से ही सफलता नहीं मिलती, बल्कि बुद्धिमानी से भी बड़ी बड़ी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।
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