हाथी और रस्सी

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एक समय की बात है। एक व्यक्ति सर्कस देखने गया। सर्कस खत्म होने के बाद जब वह बाहर निकला, तो उसने देखा कि एक विशाल हाथी एक पतली सी रस्सी से बंधा हुआ है। यह देखकर व्यक्ति को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने सोचा, "इतना बड़ा और ताकतवर हाथी इस मामूली सी रस्सी से क्यों बंधा हुआ है? यह तो इसे आसानी से तोड़ सकता है।"

उस व्यक्ति की जिज्ञासा बढ़ गई। उसने वहां खड़े ट्रेनर से पूछा, "यह हाथी इतनी ताकत होने के बावजूद इस पतली सी रस्सी को क्यों नहीं तोड़ता?"

ट्रेनर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "जब यह हाथी बहुत छोटा था, तब हमने इसे इसी रस्सी से बांधा था। उस समय यह रस्सी तोड़ने के लिए बहुत कोशिश करता था, लेकिन उसकी ताकत कम थी, इसलिए वह रस्सी नहीं तोड़ पाता था। धीरे-धीरे उसे यह विश्वास हो गया कि वह इस रस्सी को कभी नहीं तोड़ सकता। अब जब यह बड़ा और ताकतवर हो गया है, तब भी यह वही सोचता है और कोशिश ही नहीं करता।"

यह सुनकर व्यक्ति चकित रह गया। उसने सोचा, "यह हाथी अपनी बचपन की असफलता के कारण अपनी ताकत का उपयोग ही नहीं कर पा रहा है।"

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि बचपन की असफलताएं या पुराने अनुभव हमारे मन में ऐसी धारणाएं बना देते हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। हमें अपनी ताकत को पहचानना चाहिए और विश्वास रखना चाहिए कि हम किसी भी बंधन को तोड़ सकते हैं।

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