अपनी डोर भगवान के हाथ

एक संत एक छोटे से आश्रम का संचालन करते थे। एक दिन, संत जी पास के रास्ते से एक राहगीर को पकड़कर आश्रम के अंदर ले आए। फिर उन्होंने अपने शिष्यों के सामने उस राहगीर से पूछा:
"यदि तुम्हें रास्ते में सोने की अशर्फियों की एक थैली मिल जाए, तो तुम क्या करोगे?"

राहगीर ने तुरंत जवाब दिया, "अगर वह थैली मेरी नहीं है, तो मैं उसे किसी जरूरतमंद को दे दूंगा।"
https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=284691&ga=g


संत ने उसकी बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा, "बहुत अच्छा, पर अगर तुम्हें थैली का मालिक न मिले और कोई जरूरतमंद भी न मिले, तो क्या करोगे?"

राहगीर थोड़ी देर सोचकर बोला, "तो मैं उस थैली को किसी मंदिर में दान कर दूंगा।"

संत जी ने फिर पूछा, "और यदि मंदिर भी न मिले, तो?"

https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=284691&ga=g

राहगीर अब थोड़ा परेशान हुआ और बोला, "तो मैं उसे अपने पास रख लूंगा और सही मौके पर किसी अच्छे काम में इस्तेमाल करूंगा।"

संत जी ने गहरी सांस ली और कहा, "देखो बेटा, जीवन में जब तुम्हें कुछ ऐसा मिले, जिसे तुम अपना नहीं मानते, तो उसकी डोर भगवान के हाथ में ही रहने दो। मनुष्य का स्वभाव है कि वह चीजों को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। लेकिन जब हम अपने नियंत्रण को छोड़कर अपनी डोर भगवान के हाथों में सौंप देते हैं, तो वही सही रास्ता होता है।"

https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=284691&ga=g

संत की यह बात सुनकर राहगीर और शिष्य सभी चकित रह गए। सबने समझा कि यह कहानी सिर्फ एक थैली की नहीं, बल्कि जीवन की हर परिस्थिति में भगवान पर भरोसा करने का पाठ सिखा रही है।

शिक्षा:
अपने जीवन की हर परिस्थिति और निर्णय की डोर भगवान के हाथ में सौंपें। जब हम ईश्वर पर भरोसा करते हैं, तो हमारे जीवन का हर रास्ता सही दिशा में जाता है।
<script type="text/javascript" src="https://udbaa.com/bnr.php?section=General&pub=284691&format=300x250&ga=g"></script>
<noscript><a href="https://yllix.com/publishers/284691" target="_blank"><img src="//ylx-aff.advertica-cdn.com/pub/300x250.png" style="border:none;margin:0;padding:0;vertical-align:baseline;" alt="ylliX - Online Advertising Network" /></a></noscript>

Post a Comment

0 Comments