बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से राज्य में एक राजा राज करता था। वह अपने राज्य को समृद्ध बनाने के लिए हमेशा प्रयास करता था। लेकिन वह कभी-कभी जनता के बारे में सोचने के बजाय केवल अपनी विलासिता पर ध्यान देता था।
एक दिन राजा ने घोषणा की कि वह अपने राज्य के सबसे बुद्धिमान और सच्चे व्यक्ति को ढूंढना चाहता है। उसने आदेश दिया कि सभी लोग अपने-अपने सुझाव लेकर महल आएं।
एक गरीब किसान, जो बहुत ईमानदार और मेहनती था, उस दिन राजा के पास पहुंचा। राजा ने उससे पूछा, "तुम्हारे पास ऐसा क्या है जो मुझे और मेरे राज्य को खुशहाल बना सकता है?"
किसान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "महाराज, मेरे पास सिर्फ एक विचार है। अगर आप अपनी प्रजा के सुख-दुख में शामिल हो जाएंगे, तो राज्य अपने आप खुशहाल हो जाएगा।"
राजा को यह बात समझ नहीं आई। उसने कहा, "मैं राजा हूं, मुझे जनता के छोटे-छोटे मामलों में पड़ने की क्या जरूरत है?"
किसान ने तब राजा को एक खेत में चलने का न्योता दिया। राजा उसकी बात मानकर खेत पहुंचा। किसान ने राजा को दिखाया कि कैसे बीज बोने से लेकर फसल काटने तक मेहनत करनी पड़ती है। उसने कहा, "महाराज, जैसे इस खेत में मेहनत किए बिना फसल नहीं उगती, वैसे ही प्रजा का सुख देखे बिना राज्य खुशहाल नहीं हो सकता।"
राजा को किसान की बात समझ में आई। उसने उसी दिन से जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी शुरू कर दीं। धीरे-धीरे राज्य समृद्ध और खुशहाल बन गया।
नैतिक शिक्षा
यह कहानी हमें सिखाती है कि एक सच्चा नेता वही होता है जो अपनी प्रजा के साथ खड़ा रहे और उनकी समस्याओं को समझे।
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