किसी घने जंगल में एक विशाल पीपल के वृक्ष पर एक गरुड़ अपने परिवार के साथ रहता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी गरुड़ी और दो छोटे-छोटे बच्चे थे। पहले गरुड़ बहुत ताकतवर और तेज़ था। वह रोज़ शिकार करके अपने परिवार का पेट भरता था। उसके घर में कभी खाने की कमी नहीं होती थी।
लेकिन समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता…
एक दिन गरुड़ शिकार की तलाश में दूर निकल गया। वहाँ उसे एक बड़ा और खतरनाक जानवर दिखा। उसने हिम्मत करके उस पर हमला किया, लेकिन उस जानवर ने पलटवार कर दिया। इस लड़ाई में गरुड़ बुरी तरह घायल हो गया। किसी तरह वह अपनी जान बचाकर अपने घोंसले तक पहुँचा।
अब वह पहले जैसा मजबूत नहीं रहा। उसके पंख कमजोर हो गए थे, और वह दूर तक उड़ भी नहीं पाता था। धीरे-धीरे घर में खाने की कमी होने लगी। छोटे-छोटे बच्चे भूख से तड़पने लगे। गरुड़ी भी चिंतित रहने लगी।
एक दिन गरुड़ी ने कहा, “अगर हम ऐसे ही बैठे रहे तो हमारे बच्चों का क्या होगा? हमें कुछ करना होगा।”
गरुड़ ने हिम्मत जुटाई और कहा, “तुम ठीक कहती हो। चाहे मैं कमजोर हूँ, लेकिन कोशिश करना नहीं छोड़ूँगा।”
अगले दिन वह फिर से उड़ने की कोशिश करने लगा। पहले तो वह गिर पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। रोज़ थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करता गया। धीरे-धीरे उसकी ताकत लौटने लगी।
इसी बीच, गरुड़ी भी छोटे-मोटे कीड़े-मकोड़े पकड़कर बच्चों को खिलाने लगी। दोनों ने मिलकर मुश्किल समय का सामना किया।
कुछ दिनों बाद, गरुड़ फिर से पहले जैसा ताकतवर हो गया। अब वह आसानी से शिकार करने लगा और परिवार की हालत सुधरने लगी। बच्चों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई।
सीख: मुश्किल समय (गरीबी के दिन) हर किसी की जिंदगी में आते हैं, लेकिन जो लोग हिम्मत और मेहनत नहीं छोड़ते, वे एक दिन जरूर सफलता पा लेते हैं।
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