“चावल का दाना: एक छोटी सी दान की सीख देने वाली दिल छू लेने वाली बोध कथा”


एक भिखारी एक दिन सुबह अपने घर के बाहर निकला। आज त्यौहार का दिन था। उसके मन में आशा थी कि आज गाँव में उसे अच्छी भिक्षा मिल जाएगी।
जाने से पहले उसने अपनी झोली में थोड़े से चावल के दाने डाल लिए। वह जानता था कि अगर झोली भरी हुई दिखाई देगी, तो लोग आसानी से दान देंगे। उन्हें लगेगा कि किसी और ने भी पहले ही कुछ दिया है।
सुबह का समय था। सूरज बस निकलने ही वाला था। रास्ते सुनसान थे, लोग धीरे-धीरे जाग रहे थे। तभी वह मुख्य मार्ग पर पहुँचा ही था कि सामने से राजा का रथ आता हुआ दिखाई दिया।
भिखारी के मन में खुशी की लहर दौड़ गई। उसने सोचा—
“आज तो मेरा भाग्य खुल गया! आज तक मैं कभी राजा से भिक्षा नहीं माँग पाया, क्योंकि द्वारपाल मुझे महल के बाहर ही रोक देते थे। लेकिन आज तो स्वयं राजा मेरे सामने आ रहे हैं।”
राजा का रथ उसके पास आकर रुक गया। भिखारी ने जल्दी से अपनी झोली आगे कर दी, इस आशा में कि राजा उसे बहुत सारा धन या अन्न देंगे।
लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
राजा रथ से नीचे उतरे, उसके पास आए और अपनी हथेली उसकी ओर बढ़ाते हुए बोले—
“हे भिखारी, आज मुझे कुछ दान दो।”
यह सुनकर भिखारी स्तब्ध रह गया। वह सोचने लगा—
“यह क्या! मैं तो खुद भिखारी हूँ, और राजा मुझसे दान माँग रहे हैं?”
उसके मन में लालच और असमंजस पैदा हो गया। बहुत सोच-विचार के बाद उसने अपनी झोली में हाथ डाला और बहुत अनिच्छा से सिर्फ एक चावल का दाना निकालकर राजा की हथेली पर रख दिया।
राजा मुस्कुराए, दाना लिया और बिना कुछ कहे अपने रथ में बैठकर आगे बढ़ गए।
भिखारी उदास हो गया। वह सोचता रहा—
“काश! राजा ने मुझे कुछ दिया होता… आज तो मेरा दिन ही खराब हो गया।”
दिन भर भटकने के बाद शाम को जब वह अपने घर लौटा, तो उसने अपनी झोली खाली करने के लिए उसे उल्टा किया।
तभी उसकी नजर एक चमकती हुई चीज़ पर पड़ी।
वह चौंक गया—
झोली में एक सोने का दाना था!
उसने तुरंत पहचान लिया कि यह वही चावल का दाना है, जो उसने राजा को दिया था।
अब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह पछताने लगा और रोते हुए बोला—
“हाय! अगर मैंने उस समय अपनी पूरी झोली राजा को दे दी होती, तो आज मेरी पूरी झोली सोने से भर जाती!”
शिक्षा (Moral):
👉 जीवन में हम जितना देते हैं, हमें कई गुना होकर वापस मिलता है।
👉 देने में कभी कंजूसी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सच्चा दान ही असली समृद्धि लाता है।

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