🐇 खरगोश और मेंढक 🐸

बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में कुछ खरगोश रहते थे। वे हमेशा डर में जीते थे। कभी शिकारी का भय, कभी जंगली जानवरों का, तो कभी इंसानों का। उन्हें लगता था कि इस दुनिया में सबसे असहाय और डरपोक जीव वही हैं।
एक दिन सभी खरगोश बहुत दुखी हो गए। उन्होंने आपस में कहा—
“ऐसी डर भरी ज़िंदगी जीने से अच्छा है कि हम अपनी जान ही दे दें। हर कोई हमें मारना चाहता है।”
यह सोचकर सभी खरगोश आत्महत्या करने के इरादे से नदी की ओर चल पड़े, ताकि उसमें कूदकर अपने प्राण त्याग दें।
जब वे नदी के पास पहुँचे, तो अचानक उनके पैरों की आहट और शोर सुनकर नदी के किनारे बैठे मेंढक घबरा गए। डर के मारे सारे मेंढक फुर्ती से उछलकर नदी में कूद गए।
यह दृश्य देखकर एक खरगोश रुक गया। उसने बाकी खरगोशों से कहा—
“दोस्तों, ज़रा सोचो! हम खुद को सबसे डरपोक समझ रहे थे, लेकिन देखो—हमसे भी छोटे और कमजोर जीव हैं, जो हमसे डरते हैं।”
सभी खरगोश यह सुनकर सोच में पड़ गए। उन्हें एहसास हुआ कि दुख और डर केवल उन्हीं के जीवन में नहीं है। हर प्राणी किसी न किसी से डरता है।
तभी सभी खरगोशों ने आत्महत्या का विचार त्याग दिया और जीवन को नए नजरिए से देखने का निश्चय किया।
🌼 शिक्षा (Moral):
दुनिया में हर किसी के जीवन में समस्याएँ होती हैं। खुद को सबसे दुखी समझकर हार मान लेना सही नहीं है। जीवन अनमोल है, उसे हिम्मत और आशा के साथ जीना चाहिए।

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