https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बहुत समय पहले धरणीपुर नाम के गाँव में रघुनाथ नाम का एक किसान रहता था। वह अत्यंत मेहनती था, लेकिन उसकी फसल बार-बार खराब हो जाती थी। फिर भी वह धरती को प्रणाम कर कहता—
“माँ, मैं शिकायत नहीं करूँगा, बस कर्म करता रहूँगा।”
🌿 परीक्षा
एक वर्ष सूखा, अगले वर्ष बाढ़—गाँव के लोग निराश हो गए। कई किसानों ने खेती छोड़ दी, पर रघुनाथ ने हल थामे रखा।
🌟 माता की लीला
एक रात स्वप्न में पृथ्वी माता प्रकट हुईं—
हरे वस्त्र, अन्न से भरी गोद, शांत तेज।
उन्होंने कहा—
“जो धैर्य से बोता है, वही सही समय पर काटता है।”
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233🌼 फल
अगले मौसम में भूमि उपजाऊ हो गई। फसल लहलहा उठी। रघुनाथ ने अन्न दान किया और कभी घमंड नहीं किया।
🌸 शिक्षा
👉 धैर्य और कर्म का फल अवश्य मिलता है।
👉 धरती का सम्मान ही सच्ची समृद्धि है।
🙏✨
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