🐸 समझदार मेंढक और कुआँ 🕳️


एक गाँव में एक गहरा कुआँ था। उसमें एक मेंढक रहता था। वह समझदार था, लेकिन कभी-कभी ज़्यादा बोलता था।
एक दिन कुछ दूसरे मेंढक कुएँ के पास आए और बोले,
“इस कुएँ में रहना ख़तरनाक है। बाहर की दुनिया बहुत बड़ी और सुंदर है।”
कुएँ का मेंढक हँसकर बोला,
“इस कुएँ से बड़ा कुछ नहीं हो सकता।”
कुछ दिनों बाद भारी बारिश हुई। कुआँ भर गया और मेंढक मुश्किल में पड़ गया। किसी तरह वह बाहर निकला और उसने विशाल तालाब और खेत देखे।
उसे अपनी गलती समझ आ गई। वह बोला,
“दुनिया सच में बहुत बड़ी है।”
📘 शिक्षा:
संकुचित सोच हमें पीछे रखती है, खुले मन से सीखना चाहिए।

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