थाली में रखा भगवान

सुबह का समय था।
मंदिर के बाहर एक वृद्ध महिला रोज़ की तरह फूल और अगरबत्ती बेचने बैठी थी।
भूख से उसका चेहरा मुरझाया हुआ था, लेकिन सामने रखी पूजा की थाली में उसने कुछ भी नहीं खाया था।
लोग आते, पूजा का सामान लेते और आगे बढ़ जाते।
कई लोग भगवान के चरणों में प्रसाद चढ़ा रहे थे,
लेकिन उस महिला की ओर किसी की नज़र नहीं गई।
तभी एक युवक मंदिर से बाहर आया।
उसके हाथ में प्रसाद की थाली थी।
वह अचानक रुक गया।
उसने देखा—
महिला के हाथ काँप रहे थे,
आँखें बार-बार उसी प्रसाद की थाली को देख रही थीं।
युवक ने बिना कुछ कहे
अपनी पूरी थाली उसके सामने रख दी।
महिला चौंक गई—
“बेटा, ये तो भगवान का प्रसाद है…”
युवक मुस्कुराया और बोला—
“माँ, आज भगवान ने मुझसे कहा है
कि उनका प्रसाद पहले आप खाओ।”
महिला की आँखों से आँसू बह निकले।
उसने काँपते हाथों से पहला कौर लिया और बोली—
“आज सच में भगवान मिल गए।”
युवक मंदिर की ओर देखकर मन ही मन बोला—
“भगवान,
अगर तुम खुश हो,
तो मैं भी खुश हूँ।”
उस दिन उसने समझ लिया—
भगवान मंदिर में कम,
और जरूरतमंद की भूख में ज्यादा मिलते हैं।
अगर आप चाहें तो
इसी कहानी का image prompt,
2 लाइन की सीख,
या बच्चों के लिए छोटा संस्करण भी बना सकता हूँ।

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