ब्राह्मण का उपहार


https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233एक दिन एक ब्राह्मण को उपहार में एक मोटी-ताज़ी बकरी मिली। वह बहुत खुश हुआ। उसने बकरी को अपने कंधों पर उठाया और घर की ओर चल पड़ा।
रास्ते में तीन ठग उसे बकरी ले जाते हुए दिखे। उन्होंने बकरी देखकर योजना बनाई।
पहले ठग ने कहा,
“वाह! कितनी बढ़िया मोटी बकरी है।”
दूसरे ने कहा,
“यह हमारे लिए अच्छा भोजन हो सकता है। किसी तरह इसे हथिया लेते हैं।”
तीसरे ठग ने चालाकी से कहा,
“सीधे छीनेंगे तो पकड़े जाएंगे। दिमाग से काम लेते हैं।”
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233थोड़ी दूर जाकर पहला ठग ब्राह्मण के पास आया और बोला,
“अरे ब्राह्मण देव! आप कंधे पर कुत्ता क्यों लेकर जा रहे हैं?”
ब्राह्मण ने गुस्से में कहा,
“अंधे हो क्या? यह बकरी है।”
ब्राह्मण आगे बढ़ गया। कुछ दूर चलने पर दूसरा ठग मिला। उसने भी वही बात दोहराई,
“अरे! इतना बड़ा कुत्ता कंधे पर क्यों उठाया है?”
ब्राह्मण थोड़ा चौंका, पर बोला,
“तुम भी गलत देख रहे हो। यह बकरी है।”
वह आगे बढ़ा। अब तीसरा ठग सामने आया और हँसते हुए बोला,
“ब्राह्मण जी, लोग क्या कहेंगे? कंधे पर कुत्ता उठाकर घूम रहे हो!”
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233अब ब्राह्मण का मन डगमगा गया। उसने सोचा—
“तीन-तीन लोग एक ही बात कह रहे हैं, कहीं मैं सच में गलत तो नहीं?”
संदेह में आकर उसने बकरी को ज़मीन पर उतार दिया और उसे छोड़कर चला गया।
जैसे ही ब्राह्मण गया, तीनों ठग हँसते हुए बकरी लेकर भाग गए।
शिक्षा (नीति):
बार-बार कही गई झूठी बात भी कभी-कभी सच लगने लगती है।
दूसरों की बातों में आकर अपना विवेक नहीं खोना चाहिए।

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