https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में धर्मदास नाम का एक गरीब लेकिन अत्यंत श्रद्धालु व्यक्ति रहता था। उसके पास न धन था, न वैभव, पर उसके हृदय में भगवान विष्णु के प्रति अटूट भक्ति थी।
धर्मदास प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर नदी में स्नान करता, फिर तुलसी दल और शुद्ध जल से भगवान विष्णु की पूजा करता। कई बार उसके पास चढ़ाने के लिए फल या मिठाई भी नहीं होती, लेकिन वह प्रेम और विश्वास से हाथ जोड़कर कहता—
“हे प्रभु! मेरे पास कुछ नहीं, पर मेरा मन आपके चरणों में है।”
🌿 परीक्षा का समय
एक दिन गाँव में भयंकर अकाल पड़ा। लोग भूख से परेशान होने लगे। धर्मदास के घर में भी कई दिनों से अन्न का एक दाना नहीं था। फिर भी उसने भगवान से कोई शिकायत नहीं की।
उसी रात भगवान विष्णु एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर उसके द्वार पर आए और बोले—
“वत्स, क्या मुझे थोड़ा भोजन मिल सकता है?”
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233धर्मदास के नेत्रों में आँसू आ गए। उसने कहा—
“प्रभु, मेरे पास स्वयं खाने को कुछ नहीं, लेकिन यदि मेरा यह शरीर ही आपके काम आए, तो मैं धन्य हो जाऊँगा।”
🌟 चमत्कार
धर्मदास की सच्ची भक्ति देखकर भगवान विष्णु अपने दिव्य रूप में प्रकट हो गए। पूरा आकाश प्रकाश से भर गया। प्रभु ने कहा—
“वत्स! मैंने तुम्हारी भक्ति की परीक्षा ली। सच्ची भक्ति में कोई अभाव नहीं होता।”
तुरंत ही उसके घर में अन्न, वस्त्र और धन की वर्षा होने लगी। लेकिन धर्मदास ने हाथ जोड़कर कहा—
“प्रभु, मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस मेरी भक्ति को अपने चरणों में बनाए रखना।”
भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले—
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233“ऐसे भक्त मेरे हृदय में सदा वास करते हैं।”
🌼 शिक्षा
👉 सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि विश्वास और निस्वार्थ प्रेम से होती है।
👉 भगवान धन नहीं, भक्त का हृदय देखते हैं।
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