बहुत प्राचीन समय की बात है। राजा सगर ने एक महान यज्ञ किया। यज्ञ का घोड़ा इंद्रदेव ने चुरा लिया और उसे कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। राजा सगर के 60,000 पुत्रों ने उस घोड़े को खोजते-खोजते कपिल मुनि के आश्रम को घेर लिया और उन्हें चोर समझ बैठे।
क्रोधित होकर कपिल मुनि ने अपनी तपस्या भंग होने पर उन सभी को भस्म कर दिया।
⚰️ मोक्ष के लिए माँ गंगा की आवश्यकता
सगर के पुत्रों की आत्माएं मुक्ति के लिए भटकती रहीं। तब उनके वंशज राजा भगीरथ ने संकल्प लिया कि वह माँ गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाकर अपने पूर्वजों का उद्धार करेंगे।
उन्होंने हजारों वर्षों तक कठोर तप किया, तब भगवान ब्रह्मा प्रसन्न हुए और गंगा को पृथ्वी पर भेजने को तैयार हो गए।
लेकिन गंगा का वेग इतना तेज था कि वह पृथ्वी को बहा देती। तब भगीरथ ने भगवान शिव की आराधना की। शिव जी प्रसन्न हुए और बोले:
"मैं गंगा को अपनी जटाओं में रोक लूँगा।"
🕉️ गंगा का धरती पर आगमन
जब गंगा पृथ्वी पर आईं, तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में बांध लिया, और धीरे-धीरे उनकी धार को धरती पर छोड़ा।
गंगा बहती हुई भगीरथ के पीछे-पीछे गईं, और वहाँ पहुँची जहाँ सगरपुत्रों की अस्थियाँ थीं।
गंगा जल के स्पर्श से वे सभी मोक्ष को प्राप्त हो गए।
🌟 सीख:
यह कथा बताती है कि सच्ची श्रद्धा, तप और संकल्प से कोई भी असंभव कार्य संभव हो सकता है।
माँ गंगा आज भी पापों का नाश करने वाली, मोक्ष देने वाली और पुण्य की प्रतीक मानी जाती हैं।
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