स्वर्ग और नरक भावनाओं में(एक शिक्षाप्रद कथा)


https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक संत पुरुष रहते थे। उनके दो शिष्य थे — दोनों ही किसान थे। दोनों सुबह-सुबह उठकर ईश्वर की भक्ति करते, अपने खेतों की देखभाल करते और नियमित रूप से स्वच्छता का पालन करते। दोनों का जीवन बाहर से देखने में एक समान प्रतीत होता था, परन्तु एक बड़ा प्रसन्नचित्त और संतोषी था, जबकि दूसरा हमेशा दुखी, चिड़चिड़ा और असंतुष्ट रहता।

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जब कभी कोई बात मन के अनुसार नहीं होती, वह दुखी शिष्य कलह करता, शिकायत करता, और अपने भाग्य को कोसता। दूसरी ओर, सुखी शिष्य हर स्थिति में ईश्वर की कृपा मानकर शांत और आनंदित रहता।

कुछ समय पश्चात तीनों — गुरु और दोनों शिष्य — एक-एक करके इस संसार से विदा हो गए। पुण्य के कारण वे सभी स्वर्गलोक पहुँचे। लेकिन वहाँ भी वही स्थिति देखने को मिली। जो शिष्य पृथ्वी पर प्रसन्न रहता था, वहाँ भी खुश और संतुष्ट था। और जो हमेशा दुखी रहता था, वहाँ भी अशांत और व्यथित दिख रहा था।

एक दिन दुखी शिष्य ने अपने गुरु के पास जाकर दुखी स्वर में कहा:

"गुरुदेव! आपने कहा था कि ईश्वर-भक्ति से स्वर्ग की प्राप्ति होती है, और स्वर्ग में केवल सुख ही सुख होता है। परन्तु मैं तो यहाँ भी अशांत और दुखी अनुभव कर रहा हूँ। क्यों?"

गुरु ने शांत, गंभीर स्वर में उत्तर दिया:

"वत्स! ईश्वर-भक्ति से तुम्हें स्वर्ग तो अवश्य मिला है। लेकिन सुख और दुःख केवल स्थान या परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि तुम्हारे मन की अवस्था पर निर्भर करते हैं।"

"जिसका मन शुद्ध, शांत और संतोषपूर्ण हो, वह नरक में भी सुखी रह सकता है। और जिसका मन अशांत, असंतुष्ट और मैला हो, वह स्वर्ग में भी दु:खी ही रहेगा।"

"सुख और दुःख बाहर से नहीं आते। ये मन की भावनाओं का परिणाम हैं। जब तक तुम स्वयं को नहीं बदलोगे, तब तक किसी भी स्थान पर सुख नहीं पा सकोगे।"

यह सुनकर दुखी शिष्य को सच्चा बोध हुआ। उसने अपने दोषों को पहचाना और ईश्वर-चिंतन के साथ आत्म-निरीक्षण और मन की शुद्धि का मार्ग अपनाया। धीरे-धीरे उसके चेहरे पर भी वही संतोष, वही प्रसन्नता झलकने लगी जो पहले उसके साथी में थी।


शिक्षा:

सुख और दुःख का मूल स्रोत बाहर नहीं, हमारे अपने मन में छुपा होता है।
यदि मन शुद्ध और संतुलित हो, तो जीवन में हर स्थिति आनंददायक बन जाती है।

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🙏 जय श्री राधे
🪔 श्रीजी की चरण सेवा में ही सच्चा सुख है।
🌸 प्रेम, भक्ति और आत्म-चिंतन ही स्वर्ग के द्वार हैं।<amp-auto-ads type="adsense"

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