एक बार की बात है, एक गरीब किसान रामू अपने छोटे से गाँव में रहता था। वह दिन-रात मेहनत करता था, लेकिन फिर भी उसकी गरीबी दूर नहीं हो रही थी। उसी गाँव में एक बहुत ही अमीर व्यापारी सेठ गोपाल भी रहता था, जो अपनी दौलत पर बहुत घमंड करता था।
एक दिन सेठ गोपाल ने रामू को ताना मारते हुए कहा, "तू इतनी मेहनत करता है, फिर भी गरीब है। असली ताकत और खुशी पैसे में होती है।"
रामू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "सेठ जी, असली खुशी और दौलत पैसे से नहीं, दिल से मिलती है।"
सेठ को यह बात समझ नहीं आई और उसने रामू को एक चुनौती दी, "अगर तू एक रात मेरे खजाने के कमरे में बिताए और सुबह तेरा मन न डोले, तो मैं अपनी आधी संपत्ति तुझे दे दूंगा!"
रामू तैयार हो गया। रात में उसे सेठ के खजाने वाले कमरे में बंद कर दिया गया। वहाँ सोने-चाँदी, हीरे-जवाहरात की ढेरियां लगी थीं। लेकिन रामू को इनसे कोई लालच नहीं हुआ। उसने चैन से रात बिताई और सुबह होते ही सेठ के पास गया।
सेठ ने हैरानी से पूछा, "क्या तुझे इनकी चमक ने आकर्षित नहीं किया?"
रामू ने कहा, "नहीं सेठ जी, असली खुशी सोने-चाँदी से नहीं, संतोष और मेहनत से मिलती है। अगर दौलत ही सब कुछ होती, तो आप चैन से सो पाते!"
सेठ को रामू की बात समझ आ गई। उसने अपनी सोच बदली और गाँव में गरीबों की मदद करने लगा।
सीख:
सच्ची दौलत पैसा नहीं, बल्कि संतोष और ईमानदारी होती है। जो इंसान संतोषी होता है, वही सबसे अमीर होता है।
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