"मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।"
अर्थ:
जो मंगलों का भवन (स्रोत) और अमंगलों को हरने वाले हैं, वे दशरथ के आँगन में विहार करने वाले श्रीरामजी हम पर कृपा करें।
व्याख्या:
यह चौपाई तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस में आती है। इसमें भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन किया गया है। तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीराम स्वयं मंगलमय हैं और वे अपने भक्तों के जीवन से सभी अमंगल (दुःख, कष्ट, पाप) को दूर कर देते हैं। वे राजा दशरथ के महल में जन्म लेकर अयोध्या में पले-बढ़े। इसलिए, यह चौपाई भक्तों के लिए एक आशीर्वाद की तरह है, जो श्रीराम की कृपा प्राप्त करने के लिए इसे श्रद्धा से गाते हैं।
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