रमेश एक बहुत चालाक और बेईमान आदमी था। वह बिना मेहनत किए पैसे कमाने के नए-नए तरीके खोजता रहता था। एक दिन, बाजार में उसने एक गरीब आदमी, रघु, की जेब काट ली। रघु के पास पहले ही बहुत कम पैसे थे, और रमेश ने वही छीन लिए।
रघु बहुत दुखी हुआ और आसमान की ओर देखते हुए बोला, "हे भगवान, अगर मेरी मेहनत की कमाई किसी बेईमान के हाथ लग गई है, तो उसे इसका फल जरूर मिलना चाहिए!"
बददुआ का असर
रमेश बहुत खुश था कि उसने बिना मेहनत के पैसे कमा लिए। लेकिन दो दिन बाद अजीब घटनाएँ होने लगीं।
पहली रात, उसने सपना देखा कि एक बूढ़ी औरत उसे डाँट रही है, "तूने गरीब की कमाई चुराई है, तेरा चैन अब छिन जाएगा!" वह डर के मारे पसीने-पसीने हो गया।
दूसरे दिन, जब वह पैसे खर्च करने गया, तो वह पैसे उसके हाथ से गिरकर नाले में बह गए। उसने पकड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं आया।
फिर, उसकी दुकान में आग लग गई और उसका काफी नुकसान हो गया। अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि अचानक ये सब क्यों हो रहा है।
अहसास और पश्चाताप
रमेश समझ गया कि यह सब रघु की बददुआ का असर है। वह तुरंत रघु के पास गया, उसके पैर पकड़कर माफी माँगने लगा और कहा, "भाई, मैंने बहुत बड़ी गलती की है। मुझे माफ कर दो!"
रघु एक दयालु इंसान था। उसने कहा, "अगर सच में पछतावा है, तो अब से बेईमानी छोड़ दो और मेहनत से कमाओ।"
रमेश ने उसी दिन से अपनी बेईमानी छोड़ दी और ईमानदारी से काम करने लगा। धीरे-धीरे उसकी जिंदगी फिर से संवर गई।
शिक्षा:
जो मेहनत की कमाई चुराता है, उसका कभी भला नहीं होता। बेईमानी का फल बुरा ही होता है, इसलिए हमेशा ईमानदारी से काम करना चाहिए।
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