एक दिन की बात है। जंगल में बारिश हो रही थी, और मोर बहुत खुश था। जैसे ही पहली बूंदें गिरीं, उसने अपने रंग-बिरंगे पंख फैलाए और खुशी से नाचने लगा। उसकी सुंदरता और खुशी को देखकर जंगल के बाकी जानवर भी आनंदित हो गए।
लेकिन पास ही एक कौआ बैठा था, जो यह सब देखकर जलने लगा। उसने सोचा, “हर कोई मोर की तारीफ कर रहा है, लेकिन मुझे कोई नहीं देखता।”
कौए ने चिढ़कर कहा, “मोर, तुम केवल बारिश में ही खुश होते हो। लेकिन बाकी समय क्या? जब बारिश नहीं होती, तो तुम दुखी रहते हो, और तुम्हारी सुंदरता किसी काम की नहीं।”
मोर मुस्कुराया और बोला, “भाई कौए, मैं छोटी-छोटी खुशियों में आनंद लेना जानता हूँ। जब बारिश होती है, तो मैं नाचकर अपनी खुशी मनाता हूँ। क्या तुमने कभी अपनी खुशी को मनाने की कोशिश की है?”
कौआ यह सुनकर चुप हो गया। उसने सोचा कि सच में, वह केवल दूसरों से जलता रहा, लेकिन कभी अपनी खुशी की वजहें नहीं ढूंढीं। उस दिन से कौए ने निश्चय किया कि वह भी हर छोटे पल को खुशी से जिएगा।
शिक्षा:
हमें छोटी-छोटी खुशियों में आनंद लेना चाहिए और दूसरों की खुशी से जलन नहीं करनी चाहिए।
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