https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। उसके पास अथाह धन-संपत्ति थी, लेकिन वह हमेशा चिंता में रहता था। उसे हर समय यह डर लगा रहता कि कहीं उसका धन चोरी न हो जाए, कोई धोखा न दे दे, या उसके व्यापार में घाटा न हो जाए। चिंता के कारण वह रातों को सो नहीं पाता था और हर समय परेशान रहता था।
एक दिन, उसने सुना कि एक प्रसिद्ध साधु पास के जंगल में ठहरे हुए हैं, जो जीवन के गूढ़ रहस्यों का ज्ञान देते हैं। वह साधु के पास गया और अपनी सारी समस्याएँ बताईं।
साधु मुस्कुराए और बोले, "बेटा, क्या तुम वास्तव में सुखी होना चाहते हो?"
व्यापारी बोला, "हाँ, गुरुदेव! मैं इस चिंता से मुक्त होना चाहता हूँ।"
साधु ने उसे एक छोटी-सी पोटली दी और कहा, "इसे एक रात तक अपने सिरहाने रखकर सो जाओ, लेकिन इसे खोलना मत। सुबह मुझसे मिलना।"
व्यापारी पोटली लेकर घर आ गया। लेकिन जैसे ही रात हुई, उसका मन बेचैन होने लगा। वह सोचने लगा कि पोटली में क्या होगा? कहीं इसमें कोई बहुमूल्य रत्न तो नहीं? या कोई रहस्यमयी वस्तु?
उससे रहा नहीं गया और उसने पोटली खोल दी। उसमें कुछ साधारण पत्थर पड़े थे। व्यापारी निराश हो गया और सोचा कि साधु ने उसके साथ कोई मज़ाक किया है।
अगली सुबह वह क्रोधित होकर साधु के पास पहुँचा और बोला, "गुरुदेव, यह क्या मज़ाक था? इसमें तो सिर्फ कुछ पत्थर थे!"
साधु मुस्कुराए और बोले, "बेटा, कल रात जब तुम्हारे पास यह पोटली थी, तो तुम क्या कर रहे थे?"
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233व्यापारी बोला, "मैं सारी रात बेचैन था और सोचता रहा कि इसमें क्या होगा।"
साधु बोले, "यही तो तुम्हारी समस्या है! तुम्हारे पास अपार धन है, लेकिन तुम्हें उसका सुख नहीं मिलता, क्योंकि तुम हमेशा उसकी चिंता करते हो। जब कुछ साधारण पत्थरों की एक पोटली तुम्हें पूरी रात परेशान कर सकती है, तो सोचो, तुम्हारे असली धन की चिंता तुम्हें कितना दुःख दे रही है!"
व्यापारी को अपनी गलती समझ आ गई। उसने साधु से प्रार्थना की कि वे उसे सही राह दिखाएँ। साधु ने कहा, "संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण है मन की शांति। धन कमाओ, लेकिन उसकी चिंता में मत डूबो। उसे जरूरतमंदों में बाँटो, अच्छे कार्यों में लगाओ। यही सच्चा सुख है।"
इस सीख को पाकर व्यापारी का जीवन बदल गया। उसने धन को जरूरतमंदों की सेवा में लगाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उसकी चिंताएँ समाप्त हो गईं। अब वह सच्चे सुख और शांति का अनुभव करने लगा।
सीख:
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धन से अधिक महत्वपूर्ण मन की शांति है। अगर हम धन का सदुपयोग करें और उसकी अति-चिंता न करें, तो जीवन में सच्चा सुख और संतोष प्राप्त कर सकते हैं।
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