लोभ का परिणाम


रामू नाम का एक गरीब किसान था। वह बहुत मेहनत करता, लेकिन फिर भी उसका गुजारा मुश्किल से चलता था। एक दिन, उसे अपने खेत में एक अजीब-सी मुर्गी मिली। रामू ने उसे अपने घर ले आया और जैसे ही सुबह हुई, उसने देखा कि मुर्गी ने एक सोने का अंडा दिया था! पहले तो उसे यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब वह अंडा बाजार में बेचकर अच्छा पैसा कमाने लगा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

अब हर रोज़ सुबह मुर्गी एक सोने का अंडा देती और रामू उसे बेचकर अमीर होता जा रहा था। धीरे-धीरे उसके पास ढेर सारा धन इकट्ठा हो गया। लेकिन धन बढ़ने के साथ ही उसके मन में लालच भी बढ़ने लगा। वह सोचने लगा, "अगर यह मुर्गी रोज़ एक अंडा दे सकती है, तो इसके पेट में तो ढेर सारे सोने के अंडे होंगे! अगर मैं एक-एक करके लेने के बजाय सारे अंडे एक साथ निकाल लूं, तो तुरंत बहुत अमीर बन जाऊँगा!"

लालच के कारण वह जल्द ही अधीर हो गया। एक रात, जब सब सो रहे थे, रामू ने अपनी छुरी उठाई और मुर्गी को मार डाला। लेकिन जैसे ही उसने उसका पेट चीरकर देखा, वह दंग रह गया—अंदर एक भी अंडा नहीं था! अब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

रामू ने अपने ही हाथों अपनी किस्मत बर्बाद कर दी थी। अब न तो उसके पास मुर्गी थी और न ही रोज़ मिलने वाले सोने के अंडे।

शिक्षा:

  • लालच हमेशा विनाश का कारण बनता है।
  • धैर्य और संतोष से ही सच्ची समृद्धि मिलती है।

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