एक बार एक गुरु और उनका शिष्य जंगल के रास्ते से अपने गांव लौट रहे थे। दिन ढल चुका था और चारों ओर अंधेरा फैल गया था। ठंडी हवा के झोंके और जंगल की रहस्यमयी आवाजें माहौल को और भयावह बना रही थीं।
शिष्य ने कहा, "गुरुजी, अंधेरा काफी हो चुका है। इस जंगल में रात बिताना खतरनाक हो सकता है। क्या हम यहीं रुककर सुबह होने का इंतजार कर सकते हैं?"
गुरु ने मुस्कुराते हुए कहा, "डरना आवश्यक नहीं है, शिष्य। जीवन में अंधेरा तो अक्सर आता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम रुक जाएं। हमें अपने रास्ते पर बढ़ते रहना चाहिए।"
शिष्य ने थोड़ा डरा हुआ जवाब दिया, "लेकिन गुरुजी, हमें यह नहीं पता कि आगे क्या होगा। हो सकता है, रास्ते में कोई जंगली जानवर मिल जाए या हम रास्ता भटक जाएं।"
गुरु ने उसे शांत करते हुए कहा, "यह सच है कि भविष्य में क्या होगा, यह हमें नहीं पता। लेकिन क्या यह भी सच नहीं है कि रुकने से हमारी मंजिल और दूर हो जाएगी? अंधेरा चाहे जितना भी घना हो, यदि हम अपनी राह पर चलते रहें, तो रास्ता खुद-ब-खुद साफ हो जाता है।"
गुरु ने एक दीपक जलाया और शिष्य से कहा, "देखो, इस दीपक की रोशनी बहुत कम है, लेकिन यह हमें एक कदम आगे का रास्ता दिखा रही है। हम पूरा रास्ता नहीं देख सकते, लेकिन क्या इस छोटी रोशनी से हमें डरकर रुक जाना चाहिए?"
शिष्य ने सिर हिलाकर कहा, "नहीं गुरुजी, हमें चलना चाहिए।"
गुरु ने कहा, "यही जीवन का नियम है। हर समय पूरी तस्वीर हमारे सामने नहीं होती। हमें जो कुछ भी दिख रहा है, उसी के सहारे आगे बढ़ते रहना चाहिए।"
शिष्य ने गुरु की बात समझ ली और दोनों आगे बढ़ने लगे। रास्ते में कई कठिनाइयां आईं, लेकिन गुरु की सीख से प्रेरित होकर शिष्य ने निडर होकर उनका सामना किया। आखिरकार, वे सुरक्षित अपने गांव पहुंच गए।
सीख: जीवन में चाहे कितना भी अंधकार हो, रुकने के बजाय हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। छोटी-छोटी रोशनी भी हमें आगे का रास्ता दिखाने में सक्षम होती है।
google.com, pub-9937615590363233, DIRECT, f08c47fec0942fa0
0 Comments