शिवपुर नाम के गांव के किनारे एक घना जंगल था। उस जंगल में एक पुराना कुआं था, जिसे लोग "भूतिया कुआं" कहते थे। कहते थे कि जो भी उस कुएं के पास गया, वह कभी वापस नहीं लौटा। लोग डर के मारे उस कुएं के आसपास भी नहीं जाते थे।
एक दिन गांव में एक नौजवान लड़का आया, जिसका नाम राजू था। वह साहसी और जिज्ञासु स्वभाव का था। गांव वालों ने उसे कुएं के बारे में बताया और चेतावनी दी, "उस कुएं के पास मत जाना, बेटा। वह शापित है।"
लेकिन राजू को इन बातों पर यकीन नहीं था। उसने ठान लिया कि वह उस कुएं का रहस्य जानकर रहेगा।
अगली रात, चांदनी में नहाया जंगल अजीब सा सन्नाटा ओढ़े हुए था। राजू ने एक मशाल उठाई और कुएं की ओर चल पड़ा। जैसे ही वह कुएं के पास पहुंचा, उसे वहां की हवा भारी और ठंडी महसूस हुई। कुएं के चारों ओर झाड़ियों से अजीब-अजीब सी आवाजें आ रही थीं।
राजू ने कुएं के अंदर झांकने की कोशिश की। कुएं के भीतर एक हल्की चमक दिखाई दी। उत्सुकता में उसने एक रस्सी से खुद को बांधकर कुएं में उतरने का फैसला किया। जैसे-जैसे वह नीचे उतरता गया, उसे एक अजीब सी आवाज सुनाई देने लगी, "कौन है? लौट जाओ!"
लेकिन राजू ने हार नहीं मानी। नीचे जाकर उसने देखा कि कुएं के तल पर एक बड़ा दरवाजा था। दरवाजे पर अजीब-सी लिपि में कुछ लिखा हुआ था। उसने दरवाजा खोला तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। अंदर एक विशाल खजाना रखा था—सोने-चांदी के सिक्के, हीरे और मणियों से भरे बक्से।
तभी एक बूढ़े आदमी की परछाई वहां प्रकट हुई। उसने कहा, "यह खजाना उसी का है जो अपनी हिम्मत और दिलेरी से इसे खोज सके। लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ अच्छे कामों के लिए करना होगा। अगर लालच किया, तो तुम भी इसी कुएं का हिस्सा बन जाओगे।"
राजू ने वादा किया कि वह इस खजाने का उपयोग गांव की भलाई के लिए करेगा। बूढ़ा संतुष्ट होकर गायब हो गया। राजू ने खजाने को बाहर निकाला और गांव लौट आया। उसने उस खजाने से गांव में स्कूल, अस्पताल और नहरें बनवाईं। शिवपुर जल्द ही एक खुशहाल और समृद्ध गांव बन गया।
लेकिन राजू ने कभी किसी को उस बूढ़े आदमी की बात नहीं बताई। उसने कुएं को ढंक दिया और वहां एक मंदिर बनवा दिया ताकि कोई लालच में पड़कर फिर से कुएं के पास न जाए।
सीख: साहस और सही इरादों से बड़े से बड़ा रहस्य सुलझाया जा सकता है, लेकिन लालच विनाश का कारण बनता है।
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