kahani hindi storyछोटी चिड़िया की कहानी


एक समय की बात है। एक घोंसले में एक प्यारी सी चिड़िया अपने चार बच्चों के साथ रहती थी। घोंसला नदी के किनारे एक घने पेड़ की शाखाओं पर बना हुआ था। मम्मी चिड़िया अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखती थी। हर सुबह वह भोजन की तलाश में उड़ जाती और बच्चों के लिए दाना लाकर घोंसले में रखती।

चिड़िया के चारों बच्चे बहुत शरारती थे। वे घोंसले के अंदर ही खेलते और अपनी मम्मी से बहुत प्यार करते थे। लेकिन मम्मी चिड़िया ने उन्हें एक सख्त हिदायत दी थी,
"बच्चों, जब तक मैं घर न लौटूं, घोंसले से बाहर मत निकलना। बाहर बहुत खतरा है।"

बच्चे उनकी बात मानते थे। लेकिन एक दिन, सबसे बड़ा बच्चा सोचने लगा,
"आखिर बाहर दुनिया कैसी होगी? मम्मी तो हमेशा मना करती हैं, लेकिन मुझे एक बार बाहर देखना चाहिए।"

वह घोंसले से बाहर निकला और उड़ने की कोशिश करने लगा। लेकिन वह अभी उड़ना नहीं सीख पाया था, इसलिए वह पेड़ की एक निचली शाखा पर गिर गया। नीचे एक बिल्ली बैठी हुई थी, जिसने बच्चे को देख लिया।

बिल्ली धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी। बच्चा डर गया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा,
"मम्मी! मम्मी! बचाओ!"

मम्मी चिड़िया पास ही थी। उसने बच्चे की आवाज सुनी और तुरंत वहां पहुंच गई। उसने बिल्ली का ध्यान भटकाने के लिए जोर से चिल्लाना शुरू किया और उसकी ओर झपटने का नाटक किया। बिल्ली डर गई और भाग गई।

मम्मी चिड़िया ने बच्चे को वापस घोंसले में पहुंचाया और प्यार से कहा,
"देखा बेटा, मैंने क्यों मना किया था? बाहर की दुनिया तब तक सुरक्षित नहीं होती, जब तक तुम खुद तैयार न हो। हमेशा मेरी बात मानना, क्योंकि मैं तुम्हारा भला चाहती हूं।"

उस दिन के बाद बच्चों ने कभी मम्मी की बात नहीं टाली और जब तक वे उड़ना सीख नहीं गए, तब तक घोंसले में ही रहे।

सीख:
बड़ों की बातों में हमेशा अनुभव छिपा होता है। उनकी बात मानना हमें अनावश्यक संकट से बचा सकता है।


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