गर्मी के एक दिन में जंगल का शेर बहुत थका और प्यासा था। उसे बहुत तेज़ भूख लगी थी, इसलिए उसने जंगल में इधर-उधर खाने की तलाश शुरू की। काफी समय तक तलाशने के बाद, उसे एक छोटा सा खरगोश मिला। खरगोश बहुत डरते हुए शेर के पास आया और बोला, "महाराज, कृपया मुझे मत खाओ, मुझे जंगल में बहुत काम है। मैं आपको एक और बड़ा शिकार दिला सकता हूँ।"
शेर ने सोचा, "यह खरगोश तो बहुत छोटा है, लेकिन अगर यह मुझे और बड़ा शिकार दिला सकता है, तो क्यों न इसे छोड़ दूं?"
शेर ने खरगोश को छोड़ते हुए कहा, "ठीक है, मुझे विश्वास है कि तुम मुझे बड़ा शिकार दिला सकते हो।"
खरगोश ने शेर को एक चाल में फंसाने की सोची। उसने शेर से कहा, "जंगल के दूसरी ओर एक बहुत बड़ा शिकार है, अगर आप मेरे साथ चलें तो आप उसे आसानी से पकड़ सकते हैं।"
शेर ने खरगोश की बात मानी और उसके साथ चलने लगा। खरगोश उसे एक गहरे कुएं के पास लेकर गया और बोला, "महाराज, वह शिकार इसी कुएं के अंदर है, बस अंदर देखिए।"
शेर ने कुएं में झांकते हुए देखा, और उसे लगा कि दूसरी तरफ कोई बड़ा शिकार है। वह कूद पड़ा, लेकिन वह कुएं में फंस गया। खरगोश ने उसकी चालाकी से काम लिया और शेर को उसकी लालच की सजा दिलवायी।
इस तरह, शेर ने अपनी लालच के कारण अपनी जान गंवा दी, और जंगल में सभी जानवरों ने यह सिखा कि लालच बुरी बला है।
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