kahani hindi storyकहानी: "ईमानदार बंदर और लालची हाथी"


एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा गाँव था। गाँव में एक बड़ा सा पेड़ था, जिसके नीचे हर दिन कई जानवर इकट्ठे होते और अपनी बातें करते। इस पेड़ के पास एक प्यारा सा बंदर रहता था। बंदर बहुत ईमानदार और समझदार था। वह हमेशा अपने दोस्तों की मदद करता और किसी से भी धोखा नहीं करता।

एक दिन, वहाँ एक हाथी आया। हाथी बड़ा ही आलसी और लालची था। वह हर जगह से फल तोड़ता और अपने लिए खा जाता। लेकिन उसे यह बात बहुत अच्छी नहीं लगती थी कि जंगल के अन्य जानवरों को भी फल चाहिए। हाथी ने एक दिन बंदर से कहा, "तुम छोटे हो, तुम्हारे पास जो फल हैं, वह मुझे दे दो, मैं बड़ा हूँ और मुझे ज्यादा चाहिए।"

बंदर ने सोचा और फिर शांत स्वर में बोला, "मैं तुम्हारे लिए फल ला सकता हूँ, लेकिन तुम्हें पहले अपनी लालच को कम करना होगा। तुम जितना फल खाओगे, उतना ही जंगल का संतुलन बिगड़ेगा।"

हाथी ने बंदर की बातों को नजरअंदाज किया और कहा, "अगर तुम मुझे फल नहीं दोगे तो मैं तुम्हें परेशान करूँगा।"

बंदर ने समझदारी से हाथी से कहा, "ठीक है, अगर तुम परेशान करना चाहते हो तो कर सकते हो, लेकिन याद रखना, जो चीज़ हमें एक साथ मिलकर मिलती है, वह हमारी खुशी होती है। अकेले सब कुछ लेने से कोई सुख नहीं मिलता।"

कुछ समय बाद, हाथी ने महसूस किया कि उसका लालच उसे और बाकी जानवरों से दूर कर रहा था, जबकि बंदर ने अपनी ईमानदारी और समझदारी से सभी जानवरों को एकजुट किया। वह जानवरों का पसंदीदा दोस्त बन गया और जंगल में सबका भला किया।

इस कहानी से यह सिखने को मिलता है कि ईमानदारी और समझदारी से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है, जबकि लालच हमें दूसरों से दूर कर देता है।

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