kahani hindi storyनिर्धन बुढ़ियाऔर बिल्ली की कहानी


एक गाँव के किनारे एक छोटी-सी झोपड़ी में एक निर्धन वृद्ध महिला रहती थी। उसका जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था। न कोई परिवार था, न कोई सहारा। उसके साथ बस एक दुबली-पतली बिल्ली रहती थी, जिसे वह बेहद प्यार करती थी।

वृद्धा का गुजारा झोपड़ी के पास उगने वाले जंगली पौधों और गाँव वालों से मिलने वाले दान पर होता था। वह जो भी थोड़ी-बहुत खाने की चीजें जुटा पाती, उसमें से कुछ हिस्सा अपनी बिल्ली के लिए रख देती। बिल्ली भी समझदार थी, कभी माँग नहीं करती, बस वृद्धा की गोद में बैठकर स्नेह से उसकी ओर देखती।

एक दिन गाँव में एक भयानक तूफान आया। बारिश इतनी तेज़ थी कि वृद्धा की झोपड़ी पूरी तरह से भीग गई और जगह-जगह से टपकने लगी। वृद्धा ने जल्दी से अपनी बिल्ली को गोद में लिया और झोपड़ी के सबसे सूखे कोने में दुबक कर बैठ गई। वह लगातार सोच रही थी कि अब क्या होगा।

तूफान के बाद जब आसमान साफ हुआ, तो वृद्धा ने देखा कि उसकी झोपड़ी का आधा हिस्सा ढह चुका था। वह उदास हो गई, लेकिन उसकी बिल्ली ने उसके चेहरे को अपने नरम पंजों से सहलाया, मानो उसे हिम्मत दे रही हो। वृद्धा ने मुस्कुराते हुए कहा, "तू मेरे साथ है, तो मुझे और किसी चीज़ की परवाह नहीं।"

गाँव वालों ने जब उसकी हालत देखी, तो वे उसकी मदद के लिए आगे आए। किसी ने लकड़ी दी, तो किसी ने खाने का सामान। धीरे-धीरे वृद्धा की झोपड़ी फिर से खड़ी हो गई। वह अपनी बिल्ली को देखकर बोली, "तूने मुझे तूफान में हिम्मत दी, अब मैं तुझे कभी भूखा नहीं रहने दूँगी।"

इसके बाद वृद्धा ने पास के जंगल से लकड़ियाँ इकट्ठा करके और गाँव वालों के कपड़े सिलकर अपना छोटा-सा काम शुरू कर दिया। उसका जीवन धीरे-धीरे सुधरने लगा। उसकी बिल्ली अब पहले से ज्यादा तंदरुस्त और खुश नजर आती थी।

इस तरह, वृद्धा और उसकी बिल्ली ने अपने कठिन समय को साथ मिलकर पार किया और सिखाया कि प्यार और हिम्मत के साथ हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है।

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